जयपुर में भाजपा ने खोले पत्ते : 150 वार्डों में उतारे प्रत्याशी, सुनील कोठारी, विमल अग्रवाल, शैलेंद्र भार्गव, पुनीत कर्णावत और ज्योति खंडेलवाल मेयर की रेस में प्रमुख चेहरे
दावेदारों को फोन कर नामांकन दाखिल करने के निर्देश
जयपुर। नगर निगम चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन भारतीय जनता पार्टी ने जयपुर के 150 वार्डों में अपने प्रत्याशियों के नाम तय कर चुनावी मैदान में उतार दिए। पार्टी ने बगावत और टिकट को लेकर असंतोष से बचने के लिए अंतिम समय तक प्रत्याशियों के नामों को गोपनीय रखा। देर रात तक चली मैराथन बैठकों के बाद सोमवार सुबह दावेदारों को फोन कर नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए गए और उन्हें पार्टी के अधिकृत सिंबल उपलब्ध कराए गए। इसके बाद करीब 11 बजे प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक की गई।
भाजपा की ओर से जारी सूची में पार्टी के पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ कई नए चेहरों को भी मौका दिया गया है। पार्टी ने जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ वार्डवार राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का चयन किया है। जयपुर के 150 वार्डों में टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदारों ने आवेदन किए थे। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के बाद संभावित बगावत को रोकने की थी।
मेयर पद के लिए भी चेहरे किए तैयार :
भाजपा की इस सूची को केवल पार्षद प्रत्याशियों की सूची के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पार्टी ने कई ऐसे अनुभवी और राजनीतिक रूप से सक्रिय चेहरों को मैदान में उतारा है, जिनमें से चुनाव परिणाम के बाद महापौर पद के लिए नाम सामने आ सकते हैं। राजनीतिक हलकों में सुनील कोठारी, विमल अग्रवाल, शैलेंद्र भार्गव, पुनीत कर्णावत और ज्योति खंडेलवाल को मेयर पद की दौड़ में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
इनमें ज्योति खंडेलवाल का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। वह पहले भी जयपुर की महापौर रह चुकी हैं। कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू करने के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और इस चुनाव में भाजपा ने उन्हें वार्ड 110 से प्रत्याशी बनाया है। उनके पुराने महापौर अनुभव को देखते हुए पार्टी बोर्ड बनने की स्थिति में उनका नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में रहेगा।
वहीं, सुनील कोठारी को वार्ड 112 से मैदान में उतारा गया है, जबकि शैलेंद्र भार्गव वार्ड 43 से भाजपा प्रत्याशी हैं। दोनों नामों को संगठन में सक्रियता और राजनीतिक अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिरी समय तक चला टिकटों पर मंथन :
जयपुर में टिकट चयन को लेकर भाजपा में कई दौर की बैठकें हुईं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रत्याशियों के नामों पर मंथन किया। टिकट वितरण को लेकर पार्टी ने इतनी गोपनीयता बरती कि कई दावेदारों को सूची जारी होने से पहले ही फोन के जरिए सूचना दी गई। प्रत्याशियों को नामांकन के लिए तैयार रहने और निर्धारित समय पर पार्टी का सिंबल जमा कराने के निर्देश दिए गए।
भाजपा की रणनीति का एक अहम पहलू यह भी रहा कि प्रत्याशियों के नाम पहले से सार्वजनिक नहीं किए गए, ताकि टिकट कटने वाले दावेदारों को दूसरे दलों या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का मौका कम मिले। हालांकि टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं।
अब कांग्रेस के पत्तों का इंतजार :
भाजपा के प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के बाद अब जयपुर में मुख्य मुकाबले की तस्वीर साफ होने लगी है। कांग्रेस ने भी 150 वार्डों के लिए टिकट चयन की प्रक्रिया पूरी करने की कवायद तेज कर दी है। जयपुर कांग्रेस के सामने भी बड़ी संख्या में दावेदारों के बीच टिकट वितरण और संभावित बगावत रोकने की चुनौती है।
जयपुर नगर निगम चुनाव भाजपा के लिए खास राजनीतिक महत्व रखते हैं। पार्टी के लिए यह चुनाव संगठन की जमीनी ताकत, पार्षदों के स्तर पर पकड़ और सरकार के ढाई साल के कामकाज के प्रति शहरी मतदाताओं के रुख की परीक्षा भी माना जा रहा है। चुनाव परिणाम के बाद यदि भाजपा बोर्ड बनाने में सफल रहती है तो महापौर के चेहरे को लेकर इन प्रमुख दावेदारों में से किसी एक पर दांव लगाया जा सकता है।
इस तरह भाजपा ने वार्ड स्तर पर अपने पत्ते खोलने के साथ ही जयपुर में महापौर पद की संभावित दौड़ को भी रोचक बना दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव परिणाम के बाद पार्टी नेतृत्व अनुभवी चेहरे पर भरोसा करता है या संगठन के किसी नए चेहरे को महापौर की जिम्मेदारी सौंपता है।

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