मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सख्त एक्शन : कॉलेज प्राचार्य बर्खास्त, सेवानिवृत 10 अफसरों की रोकी पेंशन
दो मामलों में परिनिंदा का दंड
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और गंभीर कदाचार के मामलों में करीब 40 प्रकरणों पर सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने लैंगिक उत्पीड़न मामले में कॉलेज प्राचार्य को बर्खास्त करने के साथ 6 मामलों में अभियोजन की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के लैंगिक उत्पीड़न के एक प्रकरण में कॉलेज के प्राचार्य को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, इस कृत्य में सहयोग करने वाले एक प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष को भी सेवा से हटाने की मंजूरी दी है।
आधा दर्जन मामलों में अभियोजन मंजूरी :
भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामलों में पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेने से जुड़े 6 गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री ने अभियोजन की मंजूरी प्रदान की है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 तथा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत सवाई मानसिंह चिकित्सालय के वरिष्ठ आचार्य, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, वित्तीय सलाहकार, सहायक अभियंता तथा विकास अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का फैसला भी लिया है। मुख्यमंत्री ने सेवा काल में अनुशासनहीनता, दुराचरण और भ्रष्टाचार में संलिप्तता के विभिन्न मामलों में 10 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का निर्णय लिया है। इनमें 5 प्रकरणों में शत-प्रतिशत पेंशन रोकने की स्वीकृति दी गई है। एक प्रकरण में न्यायालय से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि होने पर शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का निर्णय किया है। वहीं अन्य प्रकरणों में विभागीय जांच पूरी होने तक शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का फैसला लिया है।
5 मामलों में एसीबी को जांच की अनुमति :
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17.ए के तहत विस्तृत जांच का अनुमोदन करते हुए 5 प्रकरणों में एसीबी को आगामी अन्वेषण की अनुमति दी है। इसी प्रकार राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 16 के तहत 6 प्रकरणों में विभिन्न अधिकारियों को देय वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।
दो मामलों में परिनिंदा का दंड :
मुख्यमंत्री ने सीसीए नियम 17 के तहत विचाराधीन 2 मामलों में आरोपित अधिकारियों को परिनिंदा का दंड देने की मंजूरी दी है। वहीं नियम 23 के तहत 2 रिव्यू याचिकाओं में राहत देते हुए वेतन वृद्धि रोकने के दंड को परिनिंदा में परिवर्तित करने की स्वीकृति दी है। सीसीए नियम 34 के तहत प्रस्तुत 4 रिव्यू याचिकाओं को खारिज करते हुए दंडादेश यथावत रखे गए हैं। इसकी अभिशंसा राज्यपाल को भेज दी गई है। वहीं विभागीय जांच के 4 प्रकरणों को समाप्त करते हुए आरोपित अधिकारियों को दोषमुक्त कर राहत दी गई है।

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