देवनानी का गहलोत पर पलटवार: नियम नहीं पढ़ते, जो प्रावधान बता रहे हैं वही उनके समय में बने थे

विधानसभा विवाद: वासुदेव देवनानी का गहलोत पर पलटवार, 'नियम आपके समय के ही हैं'

देवनानी का गहलोत पर पलटवार: नियम नहीं पढ़ते, जो प्रावधान बता रहे हैं वही उनके समय में बने थे

स्पीकर वासुदेव देवनानी ने विधानसभा नियमों पर अशोक गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये प्रावधान पुराने हैं।

जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर कांग्रेस नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर कड़ा पलटवार किया है। देवनानी ने कहा कि गहलोत शायद नियम पढ़ते नहीं हैं, क्योंकि जिन प्रावधानों पर वे सवाल उठा रहे हैं, वे उनके मुख्यमंत्री रहते हुए तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के समय तय किए गए थे।

देवनानी ने स्पष्ट किया कि 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र में कोई नया नियम या प्रावधान नहीं जोड़ा गया है। सदन की सभी व्यवस्थाएं पूर्ववत हैं और प्रश्नकाल, शून्यकाल, पर्ची व्यवस्था एवं प्रश्न पूछने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 से ही प्रश्नों की ग्राह्यता, समयावधि और सीमा से जुड़े प्रावधान विधानसभा बुलेटिन में शामिल हैं, जो लगातार जारी होते रहे हैं। इस बार भी वही नियम लागू हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने पर्ची व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि यह व्यवस्था पहली बार 1995 में तत्कालीन अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा के समय शुरू हुई थी, जिसे वर्ष 2021 में सी.पी. जोशी के कार्यकाल में बंद किया गया। बाद में जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए इसे पुनः प्रारंभ किया गया। वर्तमान व्यवस्था में केवल पर्ची और प्रश्न ऑनलाइन जमा करने की सुविधा जोड़ी गई है, प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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देवनानी ने “तुच्छ विषय” शब्द के उपयोग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा की नियमावली में यह प्रावधान 1956 से मौजूद है। यही नियम लोकसभा और देश की अन्य विधानसभाओं में भी लागू है। इसमें कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।

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उन्होंने कहा कि प्रश्नों को सीमित क्षेत्र और यथासंभव हाल की जानकारी तक रखने का उद्देश्य विभागों को समय पर उत्तर देने में व्यावहारिक सुविधा देना है, ताकि विधायक सदन में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सकें।

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राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार को तथ्यहीन बताते हुए देवनानी ने कहा कि विधायकों पर किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। विधानसभा सदन नियमों और स्वस्थ संसदीय परंपराओं के अनुसार संचालित होता है और सभी सदस्य उन्हीं नियमों के तहत कार्य करते हैं।

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