विश्व पर्यटन दिवस पर जयपुर ने मनाई अपनी जीवंत विरासत, “जनता के लिए पर्यटन, भविष्य के लिए विरासत”
महापौर सुनील कोठारी ने जिम्मेदार पर्यटन और विरासत संरक्षण पर दिया जोर
जयपुर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जयपुर की समृद्ध जीवंत विरासत को समर्पित एक दिवसीय सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम “जयपुर की जीवंत विरासत का उत्सव” का आयोजन जंतर-मंतर, जयपुर में किया गया। यह कार्यक्रम जयपुर हेरिटेज कम्युनिटी आउटरीच एंड कंसल्टेशन प्रोग्राम (JHCOCP) के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय निवासी, विरासत समुदाय, विद्यार्थी, वास्तुकार, शिल्पकार, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक एवं सांस्कृतिक कर्मी शामिल हुए और जयपुर की जीवंत विरासत तथा शहर के पर्यटन के भविष्य को आकार देने में सामुदायिक भागीदारी एवं जिम्मेदार पर्यटन की भूमिका पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में जयपुर के महापौर सुनील कोठारी ने विशेष रूप से सहभागिता की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने जयपुर को एक बेहतर और अधिक स्वागतयोग्य पर्यटन गंतव्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा शहर की विशिष्ट विरासत और पहचान को संरक्षित रखते हुए पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने तथा जयपुर की विरासत और सांस्कृतिक पहचान को शहर के भावी विकास के केंद्र में बनाए रखने पर भी बल दिया।
दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें जंतर-मंतर एक्सपीरिएंशियल टूर, जयपुर टूरिज्म लैब – “पर्यटन जयपुर को क्या लौटाए?”, “मेरा जयपुर, मेरी कहानी” सामुदायिक कहानी-वाचन सत्र, Aayojan School of Architecture & Design, Jaipur द्वारा स्केचिंग कैंप, शिल्पगुरु एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त बाबूलाल मारोठिया द्वारा मिनिएचर पेंटिंग कार्यशाला तथा जयपुर विरासत फाउंडेशन द्वारा आयोजित पाबूसर, चूरू के गोपाल गीला एवं समूह की “चंग” लोक सांस्कृतिक प्रस्तुति शामिल थीं। जंतर-मंतर एक्सपीरिएंशियल टूर के माध्यम से प्रतिभागियों को कहानी-वाचन एवं व्याख्या के माध्यम से इस ऐतिहासिक वेधशाला की खगोलीय एवं स्थापत्य विरासत से परिचित कराया गया। जंतर-मंतर ने जयपुर की वैज्ञानिक, स्थापत्य एवं सांस्कृतिक विरासत को समकालीन पर्यटन से जोड़ने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान किया।
जयपुर टूरिज्म लैब ने इस विषय पर संवाद का अवसर प्रदान किया कि पर्यटन स्थानीय समुदायों, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था में किस प्रकार योगदान दे सकता है। वहीं “मेरा जयपुर, मेरी कहानी” सत्र के माध्यम से स्थानीय निवासियों एवं प्रतिभागियों ने शहर से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत स्मृतियां, अनुभव और कहानियां साझा कीं, जिससे पर्यटन की चर्चा में समुदाय की आवाज को स्थान मिला। यह कार्यक्रम नगर निगम जयपुर, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान सरकार तथा Dronah Foundation द्वारा आयोजित किया गया। जयपुर विरासत फाउंडेशन, Aayojan School of Architecture and Design, Jaipur, Dhayas एवं Augtraveler कार्यक्रम के ज्ञान सहयोगी रहे।
कार्यक्रम ने “जनता के लिए पर्यटन, भविष्य के लिए विरासत” के संदेश को सशक्त किया और यह रेखांकित किया कि जयपुर की विरासत केवल उसके स्मारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उसके लोग, मोहल्ले, परंपराएं, शिल्प, कहानियां, आजीविकाएं और जीवंत सांस्कृतिक परंपराएं भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।कार्यक्रम में अधीक्षक प्रतिभा यादव भी मौजूद रहीं।

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