पीजी बॉन्ड की नई शर्तों से भविष्य के सुपरस्पेशलिस्ट संकट में, जार्ड ने जताया कड़ा विरोध, जानें क्या है पूरा मामला ?

PG डॉक्टरों के लिए सुपरस्पेशलिटी में बैंक गारंटी संकट

पीजी बॉन्ड की नई शर्तों से भविष्य के सुपरस्पेशलिस्ट संकट में, जार्ड ने जताया कड़ा विरोध, जानें क्या है पूरा मामला ?

जयपुर में राजस्थान के PG डॉक्टरों के सामने संकट, नए आदेश के अनुसार सुपरस्पेशलिटी प्रवेश के लिए 25 लाख से 1.5 करोड़ की बैंक गारंटी अनिवार्य। JARD ने विरोध जताया।

जयपुर। राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) कर चुके उन मेधावी डॉक्टरों के सामने करियर का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने अपनी मेहनत से नीट एसएस (सुपरस्पेशलिटी) की कठिन परीक्षा पास की है। 28 जनवरी 2025 को सचिवालय से संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी नए आदेशों ने प्रदेश के रेजिडेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। नए नियमों के अनुसार, अब सुपरस्पेशलिटी कोर्स में प्रवेश पाने के लिए रिलीव होने से पहले रेजिडेंट्स को बॉन्ड राशि के बराबर की बैंक गारंटी सरकार के पास जमा करानी होगी।

क्या है विवाद की मुख्य जड़?

पूर्व में नियम यह था कि यदि किसी रेजिडेंट का चयन पीजी के दौरान या बाद में सुपरस्पेशलिटी के लिए होता था, तो सरकार उनसे 25 लाख रुपये का एफिडेविट (शपथ पत्र) लेकर उन्हें रिलीव कर देती थी। छात्र अपना कोर्स पूरा करने के बाद वापस राज्य में आकर बॉन्ड की सेवा शर्तें पूरी करते थे।
लेकिन नए आदेशों ने इस प्रक्रिया को अत्यंत जटिल बना दिया है:

बैंक गारंटी की अनिवार्यता: अब एफिडेविट के स्थान पर बैंक गारंटी मांगी जा रही है।

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भारी भरकम राशि: पीजी बैच 2023 और 2024 के लिए यह राशि 25 लाख रुपये है, जबकि बैच 2025 के लिए बॉन्ड राशि को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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वित्तीय बोझ: किसी भी मध्यमवर्गीय या मेधावी छात्र के लिए 25 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की बैंक गारंटी देना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
जार्ड का विरोध और डॉक्टरों की मांग

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जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (JARD) ने इस आदेश को प्रतिभा विरोधी करार दिया है। जार्ड अध्यक्ष डॉ. राजपाल सिंह मीना का कहना है कि सरकार का यह कदम प्रदेश के सबसे होनहार डॉक्टरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पीजी के बाद बॉन्ड की अनिवार्यता और इतनी बड़ी राशि की बैंक गारंटी के कारण मेधावी डॉक्टर सुपरस्पेशलिटी कोर्स करने से वंचित रह जाएंगे। हम सेवा करने से मना नहीं कर रहे, लेकिन बैंक गारंटी की शर्त हटाकर पुरानी एफिडेविट व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।

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