एसएमएस हॉस्पिटल के क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग की बड़ी उपलब्धि : मल्टीपल मायलोमा मरीज का सफल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट, सुरक्षित और स्थिर अवस्था में डिस्चार्ज
उपचार को सफलतापूर्वक अंजाम दिया
एसएमएस हॉस्पिटल के क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मल्टीपल मायलोमा और गंभीर सिलिकोसिस से पीड़ित 50 वर्षीय मरीज का उच्च जोखिम वाला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक। जटिल परिस्थितियों के बावजूद विशेषज्ञ टीम की निगरानी में उपचार सफल रहा।
जयपुर। एसएमएस हॉस्पिटल के क्लिनिकल हीमेटोलॉजी विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपलब्धि हासिल की गई है। विभाग ने मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित 50 वर्षीय पुरुष मरीज को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया है, जिनका उच्च जोखिम वाला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) किया गया था। मरीज को पहले से ही न्यूमोकोनियोसिस (सिलिकोसिस) जैसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी थी, जिससे उनकी फेफड़ों की कार्यक्षमता काफी प्रभावित थी। उन्नत सिलिकोसिस के कारण मरीज की फेफड़ों की क्षमता सीमित होने से यह ट्रांसप्लांट एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। श्वसन संबंधी जटिलताओं और संक्रमण के उच्च जोखिम के बावजूद, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर उपचार को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
ट्रांसप्लांट से पूर्व मरीज की विस्तृत तैयारी (प्री-ट्रांसप्लांट ऑप्टिमाइजेशन) की गई तथा उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से संशोधित कंडीशनिंग रेजीमेन अपनाया गया। ट्रांसप्लांट के दौरान मरीज की निरंतर निगरानी, संक्रमण नियंत्रण के कड़े प्रोटोकॉल तथा विशेष श्वसन सहयोग प्रदान किया गया। सकारात्मक रूप से, मरीज में सफल एंग्राफ्टमेंट हुआ तथा रक्त संबंधी पैरामीटर स्थिर रूप से बेहतर हुए। उपचार के दौरान मरीज की श्वसन स्थिति भी संतुलित बनी रही। वर्तमान में मरीज को स्थिर अवस्था में डिस्चार्ज किया गया है।

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