एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने किया कमाल : लिवर, किडनी और आंत में 45 मिनट तक खून की सप्लाई रोककर हार्ट की तीन सर्जरी की एक साथ

देश में पहली बार हुआ ऐसा केस

एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने किया कमाल : लिवर, किडनी और आंत में 45 मिनट तक खून की सप्लाई रोककर हार्ट की तीन सर्जरी की एक साथ

सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में एक ही मरीज पर तीन हार्ट सर्जरी एक साथ की, भारत में पहला ऐसा मामला। 25 वर्षीय मरीज की गंभीर दिल की बीमारी थी। सर्जरी 8 घंटे चली, 45 मिनट डीएचसीए में रखकर अंगों की ब्लड सप्लाई रोकी। मरीज को 6 यूनिट ब्लड दिया, जिंदा रहने की संभावना 40% से कम थी।

जयपुर। सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने सर्जरी के इतिहास में एक बार फिर कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल में एक ही मरीज के हार्ट से संबंधित तीन सर्जरी एक साथ हुईं। सर्जरी के दौरान मरीज को 6 यूनिट ब्लड भी चढ़ाना पड़ा और 14 घंटे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। मरीज के लिवर, किडनी, पेनक्रियाज, आंत आदि को स्लीप मोड में लाकर इन अंगों की 45 मिनट तक ब्लड की सप्लाई रोक दी गई। डॉक्टर्स का दावा है कि इस तरह का भारत में ये पहला केस हुआ है, जब एक साथ एक ही मरीज के हार्ट के तीन प्रोसिजर एकसाथ किए गए। दुनिया भर में ऐसे 10 से भी कम केस रिपोर्ट हुए हैं।

यह है मामला :

कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी और सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि मरीज करीब 25 साल का युवक है, जो दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। हनुमानगढ़ का रहने वाले इस मरीज के वॉल्व के अलावा मुख्य धमनी पूरी तरह ब्लॉक और खराब थी, जिसे बदलना था। इस केस में मरीज के बचने की संभावना 40 फीसदी से भी कम थी। ये सर्जरी डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. सौरभ मित्तल, डॉ. वक्ता राम चौधरी, डॉ. गौरव, डॉ. प्रितांशी सहित अन्य डॉक्टर्स ने की।

45 मिनट तक मरीज डीएचसीए में रहा :

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सीटीवीएस के सीनियर डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि इसमें मरीज के बेन्टाल प्रोसिजर, आर्च रिप्लेसमेंट और सीओए रिपेयर किया गया। ये पूरा ऑपरेशन करीब 8 घंटे चला। इस दौरान मरीज को 45 मिनट तक डीप हाइपोथर्मिक सर्कुलेटरी अरेस्ट यानी डीएचसीए प्रोसेस के तहत रखा गया। इस प्रोसिजर में मरीज के शरीर के बॉडी टैम्प्रेचर को 18 डिग्री तक कम करके उसके सभी मुख्य अंग जैसे लिवर, किडनी, पेनक्रियाज, आंत इत्यादि को स्लीप मोड में लाया जाता है। इन सभी अंगों में 45 मिनट तक ब्लड की सप्लाई रोक दी जाती है। इस केस में मरीज के जिंदा रहने की संभावना 40 फीसदी से भी कम रहती है। इसमें मुख्य धमनी पूरे शरीर में बदली गई।

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