बाजरा, ब्रॉडबैंड और बाथरूम : जनगणना 2027 दिखाएगी राजस्थान के घरों की असली तस्वीर, घर की छत और दीवारों के प्रकार, स्वामित्व, पानी के स्रोत, बिजली, शौचालय और रसोई ईंधन से जुड़े सवाल पूछे जा रहे
बाजरे से बदलेगी विकास की कहानी
जनगणना 2027 अब सिर्फ आबादी की गिनती नहीं, बल्कि राजस्थान के घर-घर की जीवनशैली का डिजिटल और सामाजिक एक्स-रे बनेगी। घर, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई ईंधन से लेकर स्मार्टफोन-इंटरनेट तक की जानकारी जुटेगी। बाजरे जैसी पारंपरिक खानपान आदतें भी रिकॉर्ड होंगी, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं की दिशा तय होगी।
जयपुर। जनगणना 2027 का पहला चरण इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और आधुनिक है। यह केवल लोगों की गिनती तक सीमित नहीं रहेगा,प्रदेशवासियों के घरों की वास्तविक स्थिति, जीवनशैली और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत दस्तावेज तैयार करेगा। सरकार के लिए यह आंकड़ों का सामान्य संग्रह नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक ढांचे का बड़ा सर्वे साबित होगा। जनगणना के दौरान परिवारों से घर की छत और दीवारों के प्रकार, स्वामित्व, पानी के स्रोत, बिजली, शौचालय और रसोई ईंधन से जुडेÞ सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश में अब भी कितने परिवार लकड़ी और उपलों पर खाना बना रहे हैं और कितने एलपीजी या आधुनिक ईंधन तक पहुंच चुके हैं।
डिजिटल राजस्थान की भी होगी पड़ताल
इस बार जनगणना का डिजिटल सुविधाओं पर भी खास फोकस है। परिवारों से मोबाइल, स्मार्टफोन, इंटरनेट, ब्रॉडबैंड और लैपटॉप जैसी सुविधाओं की जानकारी ली जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन शिक्षा का लाभ गांवों और छोटे कस्बों तक कितना पहुंच पाया है।
बाजरे से बदलेगी विकास की कहानी
राजस्थान की पारंपरिक खाद्य संस्कृति भी इस सर्वे का हिस्सा है। जनगणना 2027 के दौरान घर-घर जाकर परिवारों से मुख्य खाद्यान्न के बारे में जानकारी ली जा रही है। जिससे यह पता चलेगा कि बाजरा जैसे पारंपरिक अनाज आज भी लोगों की थाली में कितनी जगह बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना 2027 भविष्य की सरकारी योजनाओं की दिशा तय करेगी। इससे आवास, जलापूर्ति, स्वच्छता, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी नीतियों को जमीनी जरूरतों के अनुसार तैयार करने में मदद मिलेगी। राजस्थान के गांवों और शहरों के बीच बदलती दूरी की असली तस्वीर भी इसी जनगणना से सामने आएगी।

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