देवनानी संग विधानसभा का नया लोगो जारी : 13 द्वारों का नामकरण, बागड़े ने कहा- कई विश्वविद्यालयों में छात्र ही नहीं
विधायक भी वोट कटने के डर से बोलते नहीं
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नया लोगो व 13 द्वारों के नाम जारी किए। बागड़े ने कई “कागजी विश्वविद्यालयों” पर सवाल उठाते हुए मर्ज या बंद करने की बात कही। देवनानी बोले—नया लोगो जनसेवा, न्याय और संवैधानिक मर्यादा का प्रतीक है।
जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के साथ विधानसभा के नए प्रतीक चिन्ह जारी किया। साथ ही विधानसभा के 13 द्वारों के नामकरण की पट्टिका का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश में विश्वविद्यालयों को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कई विश्वविद्यालयों में दो-तीन साल से छात्र ही नहीं है। वे नाम के रह गए हैं, कागजों में ही चल रहे हैं। जबकि कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी नियुक्त हैं। ऐसे विश्वविद्यालयों को या तो बंद कर देना चाहिए या फिर उन्हें दूसरे विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में मर्ज कर देना चाहिए। विधायक भी वोट कटने के डर से बोलते नहीं है। उन्हें आवाज उठानी चाहिए। एक विश्वविद्यालय को विभाजित कर कई नए विश्वविद्यालय बना देने से संसाधन और आय भी बंट गई है, जिससे प्रबंधन पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। कई दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडलिस्ट-टॉपर छात्रों से पूछा तो वे यूपीएससी-आरपीएससी के प्रति उत्साहित नहीं। डर है कि सफल नहीं हो पाएंगे, मुख्य कारण शिक्षा की बुनियाद कमजोर होना है।
जूली पर चुटकी, महाराष्ट्र में दो एलओपी मंत्री बने थे
नेता प्रतिपक्ष पर भी चुटकी ली हुए कहा कि टीकाराम प्रदेश के सीएम रहे, मैं इन्हें ही समझता था, इनकी उम्र कम है। अब ये कब सीएम बनेंगे भविष्य की बात है। राजनीति में कब क्या होगा, पता नहीं। महाराष्ट्र में तो दो नेता प्रतिपक्ष रहे नेता इस्तीफा देकर सत्ता पक्ष में मंत्री बने थे।
नया लोगो जनसेवा, न्याय, संवैधानिक मर्यादा का प्रतीक: देवनानी
देवनानी ने कहा कि विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव की भी शुरुआत हुई है। विधानसभा करोड़ों नागरिकों की आशाओं का केंद्र है। अशोक स्तंभ, गोडावण, खेजड़ी और ऊंट जैसे प्रतीक संस्कृति, लोकमंगल और संघर्षशीलता को दर्शाते हैं। लोगो में लिखा राष्ट्राय धर्मनिष्ठा विधायिका, विधानसभा का आत्म मंत्र है, जो जनसेवा, न्याय और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रवेश द्वारों को कर्तव्य द्वार, शक्ति द्वार, सुशासन द्वार, संकल्प द्वार और शौर्य द्वार, बाहरी द्वारों को बृज, शेखावाटी, वागड़, मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती, मारवाड़ और ढूंढाड़ के नाम दिए गए हैं। कार्यक्रम में संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल, डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई मंत्री, विधायक भी मौजूद रहे।

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