पंचायत चुनाव में कांग्रेस के 30 नेताओं की साख दांव पर, 6 सांसद, 15 विधायक और 9 पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा की परीक्षा
अपने क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव का आकलन करेंगे
जयपुर। पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में कांग्रेस के छह लोकसभा सांसद, 15 विधायक और नौ पूर्व मंत्रियों की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है। मतदान के साथ ही प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद होगा, लेकिन चुनाव परिणाम इन नेताओं के अपने क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव का आकलन करेंगे। कांग्रेस ने निकाय चुनाव की तर्ज पर पंचायत चुनाव में टिकट वितरण और प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी स्थानीय सांसदों, विधायकों, विधानसभा प्रत्याशियों और पूर्व मंत्रियों को सौंपी थी। इन्हें प्रत्याशी तय करने से लेकर चुनाव प्रबंधन और प्रचार तक फ्री हैंड दिया।
छह सांसदों के क्षेत्रों में परीक्षा:- तीसरे चरण में टोंक-सवाई माधोपुर से हरीश मीणा, झुंझुनूं से बृजेंद्र ओला, श्रीगंगानगर से कुलदीप इंदौरा, दौसा से मुरारीलाल मीणा, चूरू से राहुल कस्वां और धौलपुर-करौली से भजनलाल जाटव के क्षेत्रों में मतदान हो रहा है।
15 विधायक और नौ पूर्व मंत्री भी जुटे :
प्रमोद जैन भाया, हरिमोहन शर्मा, डीसी बैरवा, जाकिर गैसावत, रामनिवास गावड़िया, शोभारानी कुशवाह, डूंगरराम गेदर, अमित चाचाण, अनीता जाटव, दीपचंद खेरिया, ललित यादव, इंदिरा मीणा, वीरेंद्र चौधरी, दयाराम परमार और अनिल शर्मा के क्षेत्रों में भी पार्टी के प्रदर्शन पर नजर रहेगी। वहीं हेमाराम चौधरी, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, वीरेंद्र बेनीवाल, ममता भूपेश सहित नौ पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट :
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन चुनावों में प्रदर्शन से नेताओं का राजनीतिक कद प्रभावित होगा। दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव उनके जनाधार और संगठनात्मक पकड़ का आकलन साबित हो सकते हैं।

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