2005 से 2021 तक चार बार योजना बनी, फिर भी नहीं हो सका एक भी शहर 'स्लम मुक्त'
20 साल में 1.30 लाख करोड़ का बजट
जयपुर। राजस्थान के शहरों को कच्ची बस्तियों से मुक्त करने के लिए पिछले दो दशकों में चार बार योजनाएं बनीं, करोड़ों खर्च हुए और हजारों परिवारों को पट्टे भी दिए गए, लेकिन आज तक प्रदेश का एक भी शहर पूरी तरह 'स्लम फ्री' नहीं बन पाया। राजस्थान की कुल 26.07 लाख की आबादी बस्तियों में रह रही है, जो शहरी आबादी का 12.13 प्रतिशत है। उल्टा हर साल शहरों की आबादी के साथ नई कच्ची बस्तियां बसती चली गईं। रोजगार, बेहतर जीवन और सुविधाओं की तलाश में गांवों से शहर आने वाले लोगों के लिए झुग्गियां ही पहला ठिकाना बन रही हैं।
20 साल में बस्तियों के विकास पर कितना खर्च
राजस्थान में कच्ची बस्तियों के विकास पर पिछले बीस साल में 1.30 लाख करोड़ रुपए का बजट खर्च किया गया। इसमें अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत मिशन, राजीव आवास, प्रधानमंत्री आवास, जेएनयूआरएम, सड़क, नाली, सीवर, जलापूर्ति के प्रोजेक्ट शामिल है। इसके बाद भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते नजर आते हैं। वर्ष 2004 से लेकर 2021 तक शहरों को स्लम फ्री बनाने की योजनाएं बनी, लेकिन हर साल संख्या बढ़ती जा रही है।
जयपुर सबसे आगे, 308 कच्ची बस्तियां दर्ज
वर्ष 2015 के सर्वे में प्रदेश के 22 शहरों में कुल 1843 कच्ची बस्तियां चिन्हित की गई थीं। इनमें सबसे अधिक 308 बस्तियां जयपुर में मिलीं। इन बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवार वषोंर् से पक्के मकान, सड़क, पानी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।
बस्तियों की स्थिति
जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार कच्ची बस्ती में रहने वाले निवासियों की सबसे अधिक जनसंख्या 3,23,400 जयपुर नगर निगम की सीमा में हैं, जो कि अकेले ही राज्य की कच्ची बस्ती जनसंख्या का 15.64 प्रतिशत है एवं जयपुर नगर की कुल जनसंख्या का 10.62 प्रतिशत है। इसके बाद राज्य की झुग्गी आबादी का कोटा (नगर निगम) 15.44 प्रतिशत, जोधपुर (नगर निगम प्लस आउट ग्रोथ) 12.29 प्रतिशत बीकानेर (नगर निगम) 5.89 प्रतिशत, अजमेर (नगर निगम) 5.35 प्रतिशत, उदयपुर (नगर निगम) 3.13 प्रतिशत है।
क्यों बढ़ रही हैं नई कच्ची बस्तियां
विशेषज्ञों के अनुसार शहरों में लगातार बढ़ते पलायन और महंगे आवास इसकी सबसे बड़ी वजह हैं। रोजगार की तलाश में आने वाले गरीब परिवार मकान खरीद या किराए पर लेने में सक्षम नहीं होते, इसलिए खाली सरकारी या निजी जमीन पर झुग्गियां बस जाती हैं। इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को अक्सर शुद्ध पेयजल, नियमित बिजली, सीवर, पक्की सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह नहीं मिल पातीं।
राजस्थान की दूसरे राज्यों से तुलना
महाराष्ट्र में 1.18 करोड़, आंध्र प्रदेश में 1.01 करोड़, पश्चिम बंगाल में 64 लाख, तमिलनाडु में 58 लाख, मध्य प्रदेश में 56 लाख बस्तियों की आबादी है, ऐसे में कहा जा सकता है कि बड़े राज्यों की तुलना में राजस्थान में शहरी स्लम आबादी फिलहाल कम है।
कच्ची बस्तियों के नियमन में सरकारें हमेशा कुछ शर्तों के साथ छूट देती है, लेकिन फिर नई बस्तियां तैयार हो जाती है। इसके लिए शहरवाइज कार्य योजना पर काम करने की जरुरत है।
एच.एस. संचेती, पूर्व सीटीपी

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