एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल पर 4 सप्ताह में निर्णय लें, वरना सीएस हाजिर होकर दें जवाब : हाईकोर्ट
अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल पर लंबे समय से कोई निर्णय नहीं लेने को गंभीरता से लिया है। अदालत ने बिल पर चार सप्ताह में अंतिम निर्णय नहीं लेने पर मुख्य सचिव को अदालत में पेश होकर जवाब देने को कहा है। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल व भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार को गत वर्ष 26 मई को भेजे पत्र की कॉपी पेश की। जिसमें केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल पर यह कहते हुए पुनर्विचार या वापस लेने के लिए कहा है कि विभिन्न पेशेवरों के लिए अलग से कानून बनाना वांछनीय नहीं है। इसके साथ ही गत 25 मई को भी केन्द्र सरकार ने पत्र लिखकर पुन: टिप्पणियां मांगी, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसके साथ ही अतिरिक्त महाधिवक्ता ने मामले में निर्णय लेने के लिए चार सप्ताह का अंतिम अवसर मांगा।
इस पर अदालत ने राज्य सरकार को बिल पर अंतिम निर्णय लेने के लिए समय देते हुए इसमें विफल होने पर मुख्य सचिव को पेश होकर शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। मामले से अधिवक्ता रामप्रसाद शर्मा व लखन शर्मा ने बताया कि याचिका में प्रदेश के वकीलों के प्रोटेक्शन सहित वकीलों के वेलफेयर फंड में राशि का अंशदान नहीं देने और नए वकीलों को स्टाइपेंड देने की मांग की है।
इसमें कहा कि अन्य राज्यों में वकीलों के वेलफेयर के लिए स्कीम हैं, लेकिन राजस्थान के वकील इससे वंचित हैं। नए वकीलों को स्टाइपेंड की जरूरत है। इसके अलावा वकीलों पर आए दिन हमले होते हैं। इसलिए उनके लिए अधिवक्ता सुरक्षा कानून बनाया जाए।

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