छह मोबाइल वैन के भरोसे लाखों मवेशी

उपचार के अभाव में बीमार पशुओं की हो जाती है मौत

छह मोबाइल वैन के भरोसे लाखों मवेशी
एक एक वैन पर कई गांवों का बोझ, समय पर उपचार करने में आ रही दिक्कत।

कोटा। कृषि के साथ पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन कोटा जिले में पशुओं की सेहत खुद बदहाल व्यवस्था के भरोसे चल रही है। जिले के हजारों गांवों और लाखों मवेशियों के उपचार की जिम्मेदारी केवल छह मोबाइल पशु चिकित्सा वैन पर टिकी हुई है। ऐसे में जब एक साथ कई गांवों से शिकायतें आती हैं तो वैन समय पर नहीं पहुंच पाती। इसका खामियाजा पशुपालकों को आर्थिक नुकसान और पशुओं को समय पर इलाज नहीं मिलने के रूप में भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशु परिवार की आय का प्रमुख स्रोत हैं। दूध उत्पादन, खेती और पशुपालन से जुड़ी आजीविका इन्हीं पर निर्भर है। ऐसे में यदि पशु बीमार हो जाए तो उसके उपचार में हुई थोड़ी-सी देरी भी पशुपालक के लिए भारी पड़ सकती है। कई मामलों में गंभीर रूप से बीमार पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिलने से उनकी मौत तक हो जाती है।

पशुपालकों को करना पड़ता इंतजार
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा वैन की सुविधा शुरू की थी ताकि चिकित्सक गांव-गांव जाकर उपचार कर सकें, लेकिन कोटा जिले में केवल छह वैन होने के कारण प्रत्येक वैन को प्रतिदिन कई गांवों में दौड़ लगानी पड़ती है। शिकायतों की संख्या अधिक होने से कई पशुपालकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई मामलों में अगले दिन तक नंबर आता है। दूर-दराज के गांवों में खराब सड़कें और लंबी दूरी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। यदि बीच में कोई गंभीर आपातकालीन मामला आ जाए तो पहले से दर्ज शिकायतों का निस्तारण और अधिक देर से हो पाता है।

बरसात में और बिगड़ जाती है स्थिति
मानसून के दौरान हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कच्चे रास्तों पर कीचड़ और जलभराव के कारण मोबाइल वैन को कई गांवों तक पहुंचने में दिक्कत होती है। ऐसे समय में पशुओं में संक्रमण और मौसमी बीमारियां भी बढ़ जाती हैं, जिससे शिकायतों का दबाव और बढ़ जाता है। पशुपालकों का कहना है कि सरकार ने सुविधा तो शुरू की, लेकिन संसाधन पर्याप्त नहीं बढ़ाए। पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि मोबाइल वैन की संख्या वर्षों से लगभग स्थिर बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रत्येक तहसील में अलग-अलग मोबाइल पशु चिकित्सा वैन उपलब्ध कराई जाए ताकि उपचार समय पर मिल सके।

कोटा जिले में पशुओं की संख्या
गाय-216343
भैंस-240628
भेड़-22434
बकरी-137387
घोड़ा-534
सूअर-6619
ऊंट-1862
बंदर-286
कुल पशु-626093

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कई बार सुबह शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन वैन शाम तक पहुंचती है। गंभीर बीमारी होने पर इतनी देर इंतजार करना मुश्किल हो जाता है। दूध देने वाली भैंस बीमार हो जाए तो रोजाना नुकसान होता है। सरकार को गांवों की संख्या के हिसाब से और मोबाइल वैन उपलब्ध करानी चाहिए।"
-रामलाल मीणा, पशुपालक, चेचट

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चेचट और रामगंजमंडी तहसील में दर्जनों गांव आते हैं। इनके लिए केवल एक ही मोबाइल वैन संचालित की जा रही है। गांवों के बीच दूरी अधिक होने से प्रतिदिन केवल चार से पांच स्थानों पर ही पहुंचा जा सकता है। जबकि शिकायतों की संख्या रोजाना करीब दस तक रहती है।
-डॉ. दीपक मीणा, पशु चिकित्सक, मोबाइल वैन 

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