कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन में कोयले पर पड़ी मानसून की मार, 5 महीनों में लगा 45.34 लाख रूपये डेमरेज चार्ज
पेनल्टी वेवर के लिए उच्चस्तर पर होगा निर्णय
कोटा। कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (ङळढर) में कोयले की आपूर्ति लेकर पहुँचने वाली मालगाड़ियों (रेक) को निर्धारित समय पर खाली न कर पाने के कारण प्लांट को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अगस्त तक के पांच महीनों के दौरान कोयला अनलोडिंग में हुई देरी पर रेलवे ने कुल 45,34,006 रूपयें का का डेमरेज चार्ज (पेनल्टी) लगाया है। रेलवे नियमों के अनुसार एक पूरी मालगाड़ी (रेक) को खाली करने के लिए लगभग 7-8 घंटे का निर्धारित समय दिया जाता है। इस समय सीमा से अधिक समय लगने पर रेलवे प्रति घंटे के हिसाब से डेमरेज चार्ज वसूलता है।
महीने वार स्थिति मानसून के साथ बढ़ता गया जुर्माना
कोटा थर्मल में 60 वैगन के रेक को खाली करने के लिए 7-8 घंटे का समय निर्धारित है, जिसके बाद प्रति घंटे डेमरेज चार्ज लगता है। चालू वित्तीय वर्ष के 5 महीनों (अप्रैल से अगस्त) में आए 470 रेकों में से 81 लेट हुए, जिससे 482 घंटे की देरी और 45.34 लाख रूपये का जुर्माना दर्ज हुआ।
अप्रैल: 76 रेकों में से केवल 3 लेट (5 घंटे की देरी), जुर्माना: 43,500 रूपये
मई: प्रबंधन शानदार रहा; 88 रेक समय पर खाली, पेनल्टी शून्य।
जून: 92 में से 5 रेक लेट (11 घंटे की देरी), जुर्माना: 94,200रूपये
जुलाई: मानसून शुरू; 122 में से 28 रेक लेट (63 घंटे की देरी), जुर्माना: 5,41,155 रूपये
अगस्त: स्थिति गंभीर; 92 में से 45 रेक लेट (403 घंटे की रिकॉर्ड देरी), रिकॉर्ड जुर्माना: 38,55,151 रूपये (कुल पेनल्टी का 85%)।
देरी के मुख्य कारण
थर्मल प्रशासन की और से कोयला खाली करने में लगने वाले अतिरिक्त समय के बारें में सफाई देते हुए बताया कि यह देरी किसी लापरवाही का नतीजा नहीं है,बारिश, चिपचिपा कोयला और रेक बंचिंग जैसे व्यावहारिक और प्राकृतिक कारण हैं।
बारिश और चिपचिपा कोयला: माइनिंग साइट और रास्ते में भारी बारिश के कारण कोयला गीला और चिपचिपा (स्टिकी) हो जाता है, जिससे वैगनों से उसे बाहर निकालने में सामान्य से कई गुना अधिक समय लगता है।
रेक बंचिंग : कई बार रेलवे ट्रैफिक के कारण एक साथ कई रेक प्लांट में पहुंच जाते हैं, जिससे अनलोडिंग सिस्टम पर अचानक भारी दबाव पड़ता है।
तकनीकी खामियां: कई बार कोयले के वैगनों के दरवाजे जाम हो जाते हैं और समय पर नहीं खुलते, जिससे अनलोडिंग प्रक्रिया बाधित होती है।
अभी जुर्माने में मिल सकती है राहत
थर्मल प्लांट प्रबंधन के मुताबिक डेमरेज चार्ज लगाना रेलवे का एक ऑटोमेटेड सिस्टम है। हालांकि, जो देरी थर्मल प्लांट के नियंत्रण से बाहर के कारणों (जैसे भारी बारिश या रेलवे ट्रैफिक) से होती है, उसका पूरा डेटा और कारण बताकर हमारे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया जाता है। वर्तमान मामले में भी प्लांट प्रबंधन द्वारा रेलवे के साथ पेनल्टी वेवर की नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
रेल्वे प्रशासन ने इसे रेल्वे की फ्रेट पॉलिसी का हिस्सा बताते हुए बताया कि रेल्वे द्वारा किसी भी संस्थान को परिवहन के टाईम बाउण्ड़ में वैगन पहुचायां जाता है। ऐसे में रेल्वे द्वारा विभागीय देरी के चलते पेनल्टी आरोपित की जाती है। यह सभी रेल्वे द्वारा माल ढ़लाई से जुड़े सेक्टर में लागू होता है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कोटा के सकतपुरा के अलावा छबड़ा और झालावाड़ सहित अन्य प्राइवेट साइडिंग्स पर भी रेलवे का यही नियम लागू होता है, और वहां भी बारिश के मौसम में अनलोडिंग प्रभावित होने से डेमरेज चार्ज लगने की संभावना बनी रहती है।
अनलोडिंग में देरी लापरवाही नहीं, बल्कि बारिश में कोयला चिपचिपा होने, रेक बंचिंग और वैगनों के दरवाजे जाम होने जैसे व्यावहारिक कारणों से हुई है। हमारे नियंत्रण से बाहर रहे कारणों का पूरा डेटा और विवरण देकर उच्च स्तर पर अपील की जा रही है। नियमानुसार पेनल्टी वेवर प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
-शिखा अग्रवाल चीफ इंजिनियर कोटा सुपर थर्मल पावर
डेमरेज चार्ज लगाना रेलवे की फ्रेट पॉलिसी का एक निर्धारित हिस्सा है। रेलवे समयबद्ध (टाइम बाउंड) तरीके से संस्थानों को वैगन उपलब्ध कराता है, और समय सीमा से ज्यादा वक्त लगने पर नियमानुसार जुर्माना आयद किया जाता है। यह नियम केवल कोटा थर्मल ही नहीं ढुलाई से जुड़ी सभी सरकारी व प्राइवेट साइडिंग्स सभी पर लागू होता है।
-सौरभ जैन वरिष्ठ मण्ड़ल वाणिज्य प्रबन्धक रेल्वे,कोटा मण्ड़ल

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