बूढ़ी वितरिकाओं का गला घोंट रहे झाड़-झंखाड़
पर्याप्त सफाई नहीं होने से जलप्रवाह में बाधा
कोटा। रबी सीजन की फसलों की बुवाई का कार्य अब तेज गति से शुरू हो गया है। किसान खेती के काम में जुट गए हैं। इसके चलते सीएडी प्रशासन की ओर से कोटा बैराज की दायीं और बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। वर्तमान में दायीं नहर में 2550 क्यूसेक और बायीं नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नहरों में पानी छोड़ दिया गया है और फसलों के लिए संजीवनी का काम करने वाली वितरिकाओं का झाड़-झंखाड़ गला घोंट रहे हैं। कचरे से अटी होने के कारण सभी खेतों पर तय समय में नहरी पानी पहुंचने में संशय बना हुआ है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है।
साफ-सफाई का कार्य अधूरा
अब तक टेल क्षेत्र में वितरिकाओं की साफ -सफाई का कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे जल प्रवाह शुरू करने के बाद टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है। टेल के रामपुरा, जखाना, मंडित्या, छावनियां, बीचडी, हणुतीया आदि वितरिकाओं की हालत खराब है। सभी ख्ररपतवार से भरी पड़ी है। हालांकि बरसात रुकने के बाद सीएडी विभाग ने समय रहते बूंदी ब्रांच सहित वितरिकाओं में मनरेगा के तहत श्रमिक लगाकर साफ-सफाई और जंगल कटिंग का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे लोगों को समय पर टेल में पानी पहुंचने की उम्मीद दिखाई दी है, लेकिन अब मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है। सीएडी विभाग किसानों की मांग पर जल प्रवाह शुरू करता है तो टेल में पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यहां पर हो रही जर्जर स्थिति
बायीं नहर से जुड़े केशवरायपाटन के सिंचित क्षेत्र के किसानों को उम्मीद थी कि नहरें पक्की होने के बाद सुविधाएं मिलेगी, लेकिन नहरों की ब्रांचों, वितरिकाओं व माइनरों सही ढंग से सफाई नहीं हो पाई है। किसान रोशनलाल और राजेन्द्र का कहना है कि पूर्व में नहरों के सुदृढ़ीकरण के दौरान सीएडी विभाग ने अलग-अलग हिस्सों में काम करवाया गया। संवेदक नहरों के पक्का करने के नाम पर लीपापोती कर चले गए। पाटन ब्रांच में नहरों के नालों के पास कच्ची जगह छोड़ दी गई। इस ब्रांच में अण्दपुरा नाले के पास कच्चा छोड़ दिया, जो कार्य किया वह निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं किया। लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया।
फैक्ट फाइल
-2.14 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है हाड़ौती की
-2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है मध्यप्रदेश की
-29 हजार हैक्टेयर में लिफ्ट परियोजनाओं से होती है सिंचाई
-2550 क्यूसेक दायीं मुख्य नहर में छोड़ रखा पानी
-500 क्यूसेक बायीं मुख्य नहर में छोड़ रखा पानी
दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है।
-जगदीश कुमार, किसान नेता
जलप्रवाह शुरू करने पहले से वितरिकाओं की साफ-सफाई करवाई गई थी। वहीं क्षतिग्रस्त स्थानों पर भी मरम्मत कार्य करवाया गया है। टेल क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
-नाथूलाल, सहायक अभियंता, सीएडी

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