करोड़ों की लागत से बने एमबीएस अस्पताल के नए आईपीडी भवन में सीवरेज की सड़ांध, मरीज बेहाल
मरीजों पर संक्रमण का खतरा, नए सीवरेज प्लांट से मिलेगी राहत
कोटा। शहर के एमबीएस अस्पताल परिसर में हाल ही में करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए चार मंजिला आधुनिक आईपीडी भवन में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और तीमारदारों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहने को तो यह नया भवन पूरी तरह से वातानुकूलित और सर्वसुविधायुक्त है, लेकिन पिछले 10 दिनों से इसके बेसमेंट में उफन रहे सीवरेज के गंदे पानी ने पूरी इमारत के माहौल को दूषित कर दिया है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि बेसमेंट की सड़ांध सीधे चौथे फ्लोर तक पहुंच रही है और यहां भर्ती मरीज व उनके परिजन सांस लेने तक को मोहताज है।
बेसमेंट बना गंदे पानी का चेंबर
नवनिर्मित भवन का बेसमेंट वर्तमान में किसी तालाब या गंदे नाले में तब्दील हो चुका है। सीवरेज चैंबर ओवरफ्लो होने के कारण यहां चारों तरफ गंदा पानी जमा है। स्थिति यह है कि बेसमेंट की दीवारों से लगातार सीपेज (रिसाव) हो रहा है और नालियां लबालब भरी हैं, लेकिन पानी की निकासी का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है। बेसमेंट स्थित पार्किंग एरिया से जैसे ही लोग लिफ्ट की ओर बढ़ते हैं, उन्हें इस बदबूदार और दलदली पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। लिफ्ट के मूवमेंट और एयर प्रेशर के चलते ग्राउंड फ्लोर की तुलना में चौथे फ्लोर पर बने कॉटेज वार्डों में यह बदबू सबसे ज्यादा एकत्र हो रही है।
मच्छर-मक्खियों का प्रकोप, संक्रमण का खतरा
बेसमेंट और नालियों में पिछले कई दिनों से ठहरे इस दूषित पानी के कारण अब पूरे भवन में गंभीर संक्रमण फैलने की आशंका पैदा हो गई है। वातानुकूलित इमारत के भीतर नमी और गंदगी के कारण छोटे-छोटे मच्छर और मक्खियाँ बहुतायत में पनपने लगे हैं। कॉटेज वार्डों और आईपीडी में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, जिससे अस्पताल परिसर में डेंगू, मलेरिया और जलजनित/वायुजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। बेसमेंट में फैली सीवरेज की भारी गंदगी और ओवरफ्लो चैंबरों के कारण हवा पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। यह हवा ऐसे पैदा हो रही है मानो किसी खुले हुए गटर के बड़े चेंबर के ठीक बीच में खड़े हों।
तीमारदारों ने कहा, बदबू से खड़ा रहना मुश्किल
अस्पताल में आए तीमारदार अयान ने बताया कि "यहां लिफ्ट में आने-जाने पर ऐसा लगता है जैसे किसी सीवरेज के चेंबर में हमें बंद कर दिया हो। लगातार आने-जाने के दौरान यह बदबू इतनी तीव्र होती है कि उल्टी करने जैसी स्थिति हो जाती है।" तीमारदारों और आमजन का साफ कहना है कि सेंट्रलाइज्ड बिल्डिंग होने के बावजूद यहाँ फैली इस बदहाली के लिए अस्पताल प्रशासन और इस आधुनिक इमारत को बनाने वाले जिम्मेदार पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। अस्पताल में अपने परिजन से मिलने आए अन्य तीमारदारों ने भी यह माना कि अस्पताल की यह बिल्डिंग बाहर से देखने में जितनी खूबसूरत है, अंदर की आबो-हवा उतनी ही दमघोंटू और खराब है। बेसमेंट की बदबू इतनी गंभीर है कि लोगों को मजबूरन बाहर कैम्ब्रिज रोड पर आना पड़ रहा है।
मैं किसी से मिलने अस्पताल आया था, जैसे ही अंदर गया, यहां की दुर्गंध देखकर मेरा माथा ठनक गया कि आखिर जो गंदगी और बदबू हमारे नांता के ट्रैचिंग ग्राउंड में महसूस होती है, वैसी ही सड़ांध इस आधुनिक अस्पताल के भीतर कैसे फैल रही है?।
-नतिन, अध्यक्ष ट्रैचिंग ग्राउंड हटाओ संघर्ष समिति
यह समस्या बिल्डिंग बनने के समय से ही है क्योंकि अस्पताल में पुरानी सीवरेज की समस्या है। नया सीवरेज प्लांट जब बनेगा, तभी इस समस्या का स्थायी निदान होगा। हालांकि, हमारे द्वारा भी पुराना सीवरेज पंप ठीक करवा लिया गया है और शीघ्र ही अस्पताल की दुर्गंध को दूर कर दिया जाएगा।
-राकेश सिंह, अस्पताल अधीक्षक

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