हाड़ौती के सबसे व्यस्त बस स्टैंड पर 'मौत का साया' : 14 हजार यात्री रोज जोखिम में, प्रशासन की फाइलों में अटका सुधार
जयपुर की टीम सर्वे कर लौटी पर दो महीने से कोई अपडेट नहीं
कोटा आगार को 98% रेवेन्यू देने वाला नयापुरा बस स्टैंड खुद उपेक्षा का शिकार।
कोटा। हाड़ौती संभाग की पहचान और राजस्थान रोडवेज के सबसे व्यस्ततम केंद्रों में शुमार नयापुरा बस स्टैंड आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस बस स्टैंड से रोजाना 14,000 से अधिक यात्री अपनी मंजिलों की ओर निकलते हैं, वहां की छत से टपकता पानी और गिरता प्लास्टर यात्रियों के लिए 'कैद खाने' जैसा अहसास कराता है। स्थिति यह है कि जयपुर से रोडवेज का प्रतिनिधिमंडल सर्वे कर प्रस्ताव तो दे गया, लेकिन कोटा के स्थानीय प्रशासन (केडीए) और रोडवेज के बीच तालमेल की कमी के कारण सुधार की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है।
खतरनाक छत: झांकती सलाखें दे रही हैं दुर्घटना को न्योता
नयापुरा बस स्टैंड की इमारत जर्जर हो चुकी है। बारिश के दिनों में छत से पानी का रिसाव आम बात है, लेकिन अब प्लास्टर गिरना यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। पिलरों और छतों से झांकती लोहे की सलाखें विभाग की लापरवाही की गवाही दे रही हैं। यात्रियों को हर वक्त इस डर में रहना पड़ता है कि कहीं ऊपर से सीमेंट का कोई हिस्सा सिर पर न गिर जाए।
रेवेन्यू में अव्वल, सुविधाओं में फिसड्डी
कोटा शहर मे कहने को तो दो बस स्टैण्ड संचालत है। आंकड़े गवाह हैं कि कोटा आगार का 98% रेवेन्यू इसी नयापुरा बस स्टैंड से आता है। कोटा डिपो में करीब 400 कार्मिकों का अमला है, जिसमें 200 रनिंग स्टाफ शामिल है। करीब 6,000 स्क्वायर मीटर में फैले इस बस स्टैंड से 80% रोडवेज बेड़ा संचालित होता है। शहर के बीचों-बीच होने के कारण यहां से आॅटो और अन्य साधन आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के यात्री इसे ही प्राथमिकता देते हैं। विडंबना देखिए, जो बस स्टैंड विभाग की तिजोरी भर रहा है, उसे ही मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसाया जा रहा है।
जयपुर से टीम आई, पर समाधान नहीं निकला
करीब दो माह पूर्व जयपुर से रोडवेज के एसई (सिविल) दीपेश नागर और कंस्ट्रक्शन सलाहकार कंपनी 'पिडकॉर' के प्रतिनिधि कोटा पहुंचे थे। उन्होंने विभिन्न विस्तृत मॉडल और खाका तैयार कर केडीए (तत्कालीन यूआईटी) को भी चर्चा विभिन्न मॉडल्स पर हुई, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो सका है कि निर्माण कार्य रोडवेज कराएगा या केडीए। अधिकारियों के बीच 'फाइनल निर्णय' के इंतजार में हजारों यात्रियों की सुरक्षा दांव पर लगी है।
यात्रियों और दुकानदारों की जुबानी: डर और उम्मीद
हजारों लोगों का आना-जाना है। बारिश में प्लास्टर कभी भी गिर जाता है। हमें यात्रियों को लगातार सावधान करना पड़ता है ताकि कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए।
-प्रकाश धामेजा (स्थानीय दुकानदार)
हम वर्षों से इसी बस स्टैंड को जानते हैं। इसका सुधार होना केवल रोडवेज के लिए नहीं, बल्कि कोटा की पहचान के लिए जरूरी है।
-अरुण जैन (यात्री, अलीगढ़-उनियारा)
पीहर से आते समय बच्चों के साथ यहीं उतरते हैं क्योंकि यहां से साधन सस्ते मिलते हैं। बस स्टैंड को विकसित करना चाहिए और महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
-सीमा वैष्णव (यात्री, नैनवां)
अधिकारियों की सफाई
जयपुर से रोडवेज विभाग की टीम आई थी। विभिन्न मॉडल्स पर चर्चा की गई है, लेकिन फाइनल निर्णय उनकी (रोडवेज) तरफ से ही होना है। वर्तमान में विभागीय रूप से हमारे पास कोई नया अपडेट नहीं आया है।
- मुकेश चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण
दो महीने पहले सिविल विंग और सलाहकार कंपनी के साथ लोकल प्रशासन की चर्चा हुई थी। विकल्पों पर विचार किया गया है, लेकिन उसके बाद से अभी तक उच्च स्तर से कोई निर्देश या अपडेट प्राप्त नहीं हुआ है।
-अजय मीणा, प्रबंधक, कोटा आगार

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