Voice Of Gen -Z & Alpha: करियर की चिंता और जिंदगी की भागदौड़ के बीच भगवान के दरबार में शांति तलाश रही जेन - जी और अल्फा पीढ़ी
पार्टी-पिकनिक से मंदिरों तक पहुंचा युवा मन, आस्था बनी सुकून का सहारा
कोटा । कभी दोस्तों के साथ पार्टी, पिकनिक और मौज-मस्ती को तरजीह देने वाली युवा पीढ़ी अब मंदिरों की चौखट पर सुकून तलाश रही है। करियर की चिंता हो या परीक्षा में सफलता की उम्मीद, नौकरी पाने की चाह हो या परिवार की खुशहाली की कामना, युवा हर परिस्थिति में भगवान का आशीर्वाद लेने मंदिरों का रुख कर रहे हैं। सोमवार को महादेव के दर्शन, मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी के दरबार में हाजिरी और विशेष अवसरों पर व्रत रखना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। आधुनिकता, सोशल मीडिया और तकनीक के दौर में आस्था का यह रंग जेन जी और अल्फा पीढ़ी की बदलती सोच को बयां कर रहा है। युवाओं के बीच धार्मिक स्थलों के प्रति बढ़ते आकर्षण की झलक तीर्थ यात्राओं में भी दिखाई दे रही है। छुट्टियों में पिकनिक स्पॉट जाने के साथ अब उज्जैन के महाकाल, वृंदावन और अयोध्या के राम मंदिर के दर्शन की योजनाएं भी युवाओं को आकर्षित कर रही हैं। दैनिक नवज्योति के ‘वॉइस ऑफ जेन जी एंड अल्फा’ अभियान के तहत युवाओं ने माना कि आस्था उन्हें मानसिक शांति, सकारात्मकता और अपनी संस्कृति से जुड़ाव का अनुभव कराती है।
प्रतिस्पर्धा के दौर में भगवान के दरबार में सुकून
आज के दौर में पढ़ाई, करियर और भविष्य को लेकर युवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। पारिवारिक परिस्थितियां और जीवन की भागदौड़ भी मन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में पूजा-पाठ और प्रार्थना को मानसिक शांति पाने का माध्यम मानते हैं। भगवान की पूजा करने से मन को सुकून मिलता है। जीवन में खुशहाली की कामना के साथ गाय को चारा खिलाना और व्रत रखना भी दिनचर्या का हिस्सा बन रहा है।
-दिव्या नागर, कॉलेज स्टूडेंट
तीर्थ यात्रा से संस्कृति से जुड़ाव
युवा अब धार्मिक स्थलों की यात्रा को भी खास महत्व देने लगे हैं। उज्जैन के महाकाल और वृंदावन जैसे तीर्थ स्थलों पर जाना अच्छा लगता है। मंदिरों में दर्शन करने से मन को शांति मिलती है और अपनी धर्म-संस्कृति को करीब से समझने का अवसर भी मिलता है। जन्माष्टमी जैसे पर्वों के साथ सोमवार, मंगलवार और शनिवार को व्रत रखना तथा कुछ समय मंदिर में बिताकर भगवान से प्रार्थना करना भी आस्था को जीवन से जोड़ता है।
-शुभांगी कौशिक, कॉलेज स्टूडेंट
आस्था के साथ मेहनत भी जरूरी
युवाओं में धार्मिक फिल्मों को लेकर भी उत्सुकता दिखाई दे रही है। हनुमान अंश फिल्म देखने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसी फिल्में युवाओं को आकर्षित करती हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भगवान का आशीर्वाद पाने के साथ मेहनत करना भी जरूरी है। व्यक्ति पूरी लगन से प्रयास करेगा, तभी उसे अपने कर्मों का फल मिलेगा। अंकुर के अनुसार, नवरात्र के पहले और आखिरी दिन व्रत रखना भी आस्था व्यक्त करने का एक तरीका है।
-अंकुश मीणा, कॉलेज स्टूडेंट
कर्म ईमानदारी से करें, प्रार्थना से मिलेगी हिम्मत
सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति को मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत देती है। उनका कहना है कि सफलता के लिए अपने कर्म पूरी ईमानदारी और मेहनत से करना जरूरी है। जब व्यक्ति अपना पूरा प्रयास करता है, तो प्रार्थना उसके विश्वास को मजबूत करती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में भगवान के प्रति आस्था युवाओं को मानसिक संबल देती है। हनुमान अंश फिल्म भी युवाओं के लिए देखने योग्य है। हर युवा को धार्मिक फिल्म देखनी चाहिए।
-मयंक राठौर, कॉलेज स्टूडेंट

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