Voice of Gen-Z & Alpha: फैशन की दौड़ में कहीं गुम न हो जाए भारतीय संस्कृति, आधुनिक बनें लेकिन मर्यादा का दामन न छोड़ें
युवाओं में आधुनिक पहनावे का बढ़ता क्रेज
कोटा। फैशन सिर्फ कपड़ों का बदलता अंदाज नहीं, बल्कि खुद को दुनिया के सामने नए रूप में पेश करने और अपनी अलग पहचान बनाने का जरिया भी है। कभी जींस-टीशर्ट, तो कभी कटी-फटी जींस और नए डिजाइन के परिधान युवाओं के बीच स्टाइल स्टेटमेंट बन रहे हैं। बदलते दौर में पहनावे को लेकर युवाओं की पसंद तेजी से बदल रही है लेकिन सवाल यह है कि क्या फैशनेबल दिखने की होड़ में संस्कृति, परंपरा और मर्यादा की अहमियत कम होती जा रही है? क्या आधुनिकता का मतलब पारंपरिक पहनावे से दूरी बनाना है? युवाओं का मानना है कि फैशन अपनाने में कोई बुराई नहीं, लेकिन इसके नाम पर अपनी सांस्कृतिक पहचान और पहनावे की गरिमा को नजरअंदाज करना सही नहीं है। उनका कहना है कि आधुनिक बनना वक्त की जरूरत हो सकती है, मगर अपनी जड़ों से जुड़े रहना भी उतना ही जरूरी है। भारतीय परिधान साड़ी, धोती-कुर्ता और सलवार-सूट आज भी हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। ऐसे में फैशन और परंपरा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। दैनिक नवज्योति के ह्यवॉयस ऑफ जेन जी एंड अल्फाह्ण अभियान के तहत युवाओं ने इसी मुद्दे पर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि पहनावा ऐसा हो, जो आधुनिक सोच के साथ व्यक्तित्व और सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाए।
मर्यादा का रखें पूरा ध्यान
छोटे कपड़े पहनना फैशन नहीं है। यदि ऐसे कपड़े पहनने हैं तो घर के अंदर ही पहनें, लेकिन घर से बाहर निकलते समय शरीर ढकने वाले कपड़ों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे लोग आपको सम्मान की नजर से देखेंगे। आजकल छोटे और कटे-फटे कपड़े पहनना फैशन बन गया है, लेकिन यदि आप चाहते हैं कि घर के बाहर या आस-पड़ोस में लोग आपको सम्मान दें और आपकी बातों को गंभीरता से लें, तो पहनावे की मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।
-अंजली यादव, कॉलेज स्टूडेंट
फैशन के चक्कर में न पकड़ें गलत राह
फैशन के चक्कर में कई युवा गलत राह पकड़ लेते हैं और अपनी मर्यादा तक भूल जाते हैं। जमाने के साथ चलना अच्छी बात है, लेकिन इतना भी आगे नहीं बढ़ना चाहिए कि भविष्य पर बुरा असर पड़े। युवतियां सलवार-सूट के साथ जींस-शर्ट या शर्ट भी पहन सकती हैं, लेकिन पहनावे में मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। युवाओं को अपने माता-पिता की सलाह भी सुननी चाहिए, क्योंकि उनका मार्गदर्शन जीवन में सही फैसले लेने में मदद करता है।
-आकांक्षा मीणा, कॉलेज स्टूडेंट
परंपराओं को भी दें जगह
आज के दौर में अपनी पहचान बनाने के लिए आधुनिकता के साथ कदम मिलाकर चलना जरूरी है। ऑफिस और कॉलेज में जींस-टीशर्ट पहनना ठीक है, लेकिन कपड़ों का चयन करते समय उनकी डिजाइन और पहनने के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। कटी-फटी या जरूरत से ज्यादा छोटे कपड़ों को फैशन का पर्याय नहीं मानना चाहिए। वहीं, घर में शादी या त्योहार जैसे अवसरों पर युवकों को धोती-कुर्ता और युवतियों को साड़ी जैसे पारंपरिक परिधान पहनने चाहिए।
-यशराज, कॉलेज स्टूडेंट
पहनावे से झलकता है व्यक्तित्व
पहनावे को लेकर युवक और युवतियों, दोनों को सजग रहने की जरूरत है। युवतियां सलवार-सूट पहन सकती हैं और शादी-पार्टी जैसे अवसरों पर जींस-टीशर्ट भी एक अच्छा विकल्प है। इसी तरह युवकों को भी अपने पहनावे पर ध्यान देना चाहिए। बरमूडा, नेकर या आड़ी-तिरछी डिजाइन और कटी-फटी जींस-टीशर्ट के बजाय वे अच्छे डिजाइन और रंगों वाले कपड़े चुन सकते हैं। कपड़ों का चयन ऐसा होना चाहिए, जो व्यक्तित्व को निखारे और अवसर के अनुरूप भी हो।
-विष्णु मीणा, कॉलेज स्टूडेंट

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