आरबीआई के 'मास्टरस्ट्रोक' से संभला रुपया; डॉलर के मुकाबले 98 पैसे की ऐतिहासिक छलांग, ₹95.75 पर पहुंचा
आयातकों को राहत
मुंबई। विदेशी मुद्रा बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच सोमवार सुबह भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 98 पैसे की शानदार और ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की है। आज शुरुआती कारोबार में रुपया शुक्रवार के बंद स्तर ₹96.73 से मजबूती के साथ ₹95.75 प्रति डॉलर पर खुला। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा वीकेंड पर उठाए गए कड़े और रणनीतिक कदमों के बाद बाजार ने इस पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
कच्चे तेल के दबाव के बीच आरबीआई का बड़ा कदम
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की बढ़ती कीमतों और मजबूत होते डॉलर इंडेक्स के कारण पिछले कुछ दिनों से भारतीय मुद्रा लगातार दबाव में थी। रुपये को इस दबाव से उबारने के लिए केंद्रीय बैंक ने शनिवार (10 अक्टूबर) को कई बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा की थी:
1. तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर विंडो: देश की तीन बड़ी सरकारी तेल विपणन कंपनियों — इंडियन ऑयल (IOC), एचपीसीएल (HPCL) और बीपीसीएल (BPCL) — की दैनिक डॉलर की पूरी जरूरत को अब आरबीआई सीधे नामित बैंकों के माध्यम से पूरा कर रहा है। इसके चलते इन कंपनियों को अब खुले बाजार (स्पॉट मार्केट) से डॉलर नहीं खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे बाजार में अचानक बढ़ने वाली डॉलर की मांग में भारी कमी आई है।
2. डेरिवेटिव्स बाजार पर सख्ती: आरबीआई ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाजार में सट्टेबाजी को रोकने के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। कैंसिल किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने पर प्रतिबंध लगाने और कुछ ट्रांजैक्शंस के लिए नई कैश रिजर्व शर्तें तय करने से डॉलर की फॉरवर्ड बुकिंग काफी महंगी हो गई है।
आयातकों को राहत
इस कदम से हाजिर बाजार में डॉलर की चौतरफा मांग पर तुरंत लगाम लगी है। फॉरेक्स ट्रेडर्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक की इस सीधी दखलअंदाजी (इंटरवेंशन) से रुपये को दीर्घकालिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है। रुपये की इस मजबूती से भारत के आयात बिल में कमी आएगी, जिससे चौतरफा महंगाई के जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी। घरेलू शेयर बाजारों ने भी मुद्रा बाजार के इस शानदार प्रदर्शन का स्वागत करते हुए शुरुआती सत्र में बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया है।

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