अमेरिका-जापान ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समझौते को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया : समझौते पर किए हस्ताश्रर, पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर विशेष जोर
विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु ने समझौते पर किए हस्ताक्षर
टोक्यो। अमेरिका और जापान ने द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समझौते को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने पर सहमति जतायी है, जिससे अनुसंधान, विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग की पुष्टि हुई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास में सहयोग संबंधी अमेरिका-जापान समझौते में संशोधन एवं विस्तार के प्रोटोकॉल पर टोक्यो में हस्ताक्षर किये गये। अमेरिका की ओर से व्हाइट हाउस कार्यालय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति के सहायक और निदेशक माइकल क्रैटसियोस ने, जबकि जापान की ओर से विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किये।
वर्ष 1988 में पहली बार हुए इस समझौते ने अमेरिका और जापान की सरकारों के बीच वैज्ञानिक सहयोग के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया है। पिछले कई दशकों में इसने दोनों देशों के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच व्यापक सहयोग को समर्थन दिया है। संशोधित समझौते के तहत वाङ्क्षशगटन और टोक्यो ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को बनाए रखने और मजबूत करने का इरादा जताया है। इसमें सुरक्षित और विश्वसनीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि समझौते का अनिश्चितकालीन विस्तार दोनों सरकारों की दीर्घकालिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता तथा दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए सहयोग जारी रखने के संकल्प को दर्शाता है।

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