सवा तीन महीने बाद भी नहीं की परिवहन की सुविधा

निजी तो दूर सरकारी बस सेवा तक शुरू नहीं कर सका प्रशासन

सवा तीन महीने बाद भी नहीं की परिवहन की सुविधा

यहां तक की सरकारी सिटी बस सेवा भी देव नारायण तक नहीं जा रही है। ऐसे में योजना जाने वाले और वहां से शहर में आने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कोटा। नगर विकास न्यास ने शहर से दूर बंधा धर्मपुरा में पशु पालकों के लिए देव नारायण आवासीय योजना बनाकर पशु पालकों को वहां शिफ्ट तो कर दिया। लेकिन सवा तीन माह बाद भी उनके लिए अभी तक वहां परिवहन की कोई सुविधा नहीं की गई है। जिससे योजना में आने-जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर विकास न्यास द्वारा करीब 300 करोड़ रुपए खर्च कर शहर से दूर बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना विकसित की है। जहां शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए पशु पालकों और पशुओं को शिफ्ट किया जाना है। हालांकि अभी तक शहर से आधे भी पशु पालक व पशु वहां शिफ्ट नहीं हो सके हैं। लेकिन जितने भी पशु पालक वहां शिफ्ट हुए हैं वे जाने के बाद सुविधाओं के अभाव में इतने अधिक परेशान हो रहे हैं कि उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हो रही है।

न्यास अधिकारियों ने जोर-शोर से 19 जून को योजना का उद्घाटन कर वहां पशु पालकों को मकानों के कब्जा पत्र सौंपे थे। जबरन शिफ्ट किए गए पशु पालकों को वहां सभी तरह की सुविधाएं देने का भरोसा न्यास अधिकारियों ने दिलाया था। लेकिन उसकी हकीकत पशु पालकों को वहां जाने पर पता चल रही है। हालत यह है कि शहर से खड़े गणेशजी मंदिर तक तो परिवहन व आवागमन की सुविधा है। लेकिन उसके बाद आगे न तो कोई ऑटो जाता है और न ही नगरीय परिवहन का कोई साधन। यहां तक की सरकारी सिटी बस सेवा भी देव नारायण तक नहीं जा रही है। ऐसे में योजना जाने वाले और वहां से शहर में आने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

उद्घाटन के समय सिटी बस चलाने का किया था वादा
देव नारायण योजना के उद्घाटन के समय न्यास के अधिकारियों ने पशु पालकों से वादा किया था कि यहां तक बस सेवा चलाई जाएगी। पशु पालक अधिकारियों पर भरोसा करके वहां चले भी गए। लेकिन योजना को शुरू हुए सवा तीन महीने से अधिक हो गया अभी तक एक बस भी वहां के लिए नहीं चली है। वहीं बस संचालन कम्पनी ने भीे वहां तक बस नहीं चलाई है।

खड़े गणेशजी से दस किमी दूर योजना
देव नारायण योजना बंधा धर्मपुरा में बनाई गई है जो खड़े गणेशजी मंदिर से भी करीब 10 किमी दूर है। खड़े गणेशजी तक तो सभी ऑटो, सिटी बस व नगरीय परिवहन के वाहन चल रहे हैं। लेकिन उसके आगे कोई भी वाहन नहीं चल रहे हैं। पशु पालकों व अन्य लोग अपने निजी वाहनों से ही वहां आ-जा रहे हैं। जिनके पास साधन नहीं हैं। वे परेशानी भुगत रहे हैं। 

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एक भी सुविधा का लाभ नहीं
देव नारायण योजना में जाने के लिए पशु पालकों को सपने तो काफी दिखाए गए थे। वहां सुविधाओं का इस तरह से प्रचार किया गया जैसे जाते ही उन्हें सब कुछ तैयार मिल जाएगा। लेकिन जब पशु पालक वहां रहने लगे तो उन्हें हकीकत पता चली। जिसमें एक भी सुविधा का लाभ उन्हें अभी तक नहीं मिल सका है। न तो स्कूल चालू हुआ है और न ही दूध डेयरी और मंडी। गोबर गैस प्लांट से लेकर परिवहन सुविधा में से कुछ भी पशु पालकों को नहीं मिला। इतना ही नहीं वहां दुकानें तक नहीं होने से लोगों को सामान लेने तक के लिए शहर आना-जाना पड़ रहा है।

लोगों की पीड़ा
यूआईटी अधिकारियों के कहने पर यहां जाकर बस तो गए लेकिन वहां कोई भी सुविधा नहीं है। वहां से शहर आने और शहर से योजना में जाने के लिए न तो बस है और न ही ऑटो मैजिक। ऐसे में शहर से सम्पर्क की कट गया है। अधिकारियों ने दावे तो बड़े-बड़े किए थे लेकिन हकीकत में सभी खोखले साबित हो रहे हैं। 
- राकेश गुर्जर

शहर में रह रहे थे जहां कोई परेशानी नहीं थी। यूआईटी ने शहर से दूर योजना में जबरन भेज दिया। लेकिन वहां कोई सुविधा नहीं है। आने-जाने के लिए कोई बस तक नहीं है। ऐसे में मोटर साइकिल से परिवार के सभी लोग तो नहीं आ-जा सकते। प्रशासन को चाहिए कि कम से कम बस तो चलाए। 
- सावित्री बाई

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यूआईटी अधिकारियों ने योजना में जाने से पहले तो बड़े-बड़े-बड़े वादे किए थे कि वहां सभी सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन वहां जाने पर कुछ भी नहीं है। न त दूध बेचने की सुविधा है और न ही बच्चों को स्कूल जाने की। आने-जाने के लिए बस तक भी शुरु नहीं की गई है। जिससे शहर में आना-जाना ही बंद हो गया है। 
- राधेश्याम गुर्जर

न्यास सचिव ने नहीं दिया जवाब
देव नारायण योजना में तीन माह बाद भी परिवहन सुविधा शुरु नहीं होने के बारे में जानने के लिए जब नगर विकास न्यास सचिव राजेश जोशी को फोन किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उसके बाद व्हाट्सएप और टैक्स्ट मैसेज भी किए लेकिन उनका भी कोई जवाब नहीं दिया।

इनका कहना है 
देव नारायण योजना में बस सेवा अभी तक शुरू नहीं हुई है। सिर्फ खड़े गणेशजी तक ही बसें जा रही है। योजना वहां से दस किमी है।इसके लिए परिवहन विभाग में परमिट के लिए आवेदन किया हुआ है। वहां से परमिट मिलेगा उसके बाद ही बस सेवा शुरू की जा सकेगी।
- सुभाष अग्रवाल, एक्सईएन नगर निगम

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