आतंकवाद से समझौता नहीं, आत्मरक्षा का अधिकार कायम, सुधार आधारित बहुपक्षवाद का समर्थक है भारत: जयशंकर
यूएनजीए में भारत का कड़ा रुख
नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की अपनी नीति को दृढ़ता से दोहराते हुए कहा है कि आतंकवाद को सामान्य घटनाएं बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती और भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।विदेश मंत्री जयशंकर ने शनिवार रात संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81 में सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और वैश्विक संस्थाओं में व्यापक भागीदारी के लिए सुधार आधारित बहुपक्षवाद की जरूरत लगातार मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को उजागर कर उन पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद और मित्रता साथ-साथ नहीं चल सकते तथा आतंकवाद के आधार पर बनी समझ को स्वाभाविक रूप से चुनौती दी जाएगी।
विदेश मंत्री ने दुनिया के अनेक हिस्सों में जारी संघर्षों पर चिंता जताते हुए खाड़ी में जारी संघर्ष को लेकर तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा तथा ऊर्जा और व्यापार के निर्बाध प्रवाह की अपील की। यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत ने कहा कि अंतहीन युद्ध अब खत्म होना चाहिए और शांति की दिशा में जारी प्रयासों का समर्थन किया। पश्चिम एशिया में भारत ने स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान को जरूरी बताया और फिलिस्तीन के लोगों के लिए मानवीय सहायता जारी रखने की बात कही।
भारत ने कहा कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है। वित्त, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीक के इस्तेमाल को दबाव के साधन में बदलने से वैश्विक भरोसा कमजोर हुआ है। ग्लोबल साउथ के सामने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त की 4 चुनौतियां भी गंभीर है। विदेश मंत्री ने भारत की विकास साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि 78 देशों में 600 बड़ी भारतीय विकास परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, कृषि, आईटी और क्षमता निर्माण शामिल हैं। भारत ने जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ पानी और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में भी अपने अनुभव साझा करने की बात कही।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत ने खाड़ी, लाल सागर और काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। भारत ने कहा कि जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। एआई के मुद्दे पर भारत ने इसे मानव सशक्तीकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर समस्याओं के समाधान का माध्यम बताया। भारत ने कहा कि प्रत्येक देश को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के अनुरूप एआई मॉडल और रणनीति विकसित करने का अधिकार होना चाहिए।
भारत ने कहा कि दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और 1945 के बाद की व्यवस्था नई वास्तविकताओं के सामने बदल रही है। भारत के अनुसार इस बदलाव के बीच शांति के लिए बातचीत, व्यापक विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय जरूरी हैं तथा सुधारित बहुपक्षवाद का मामला लगातार मजबूत हो रहा है। विदेश मंत्री ने वक्तव्य के अंत में शांति, विकास और समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता की जरूरत बताई और महात्मा गांधी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा," शांति तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है, शांति ही रास्ता है।"

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