राहुल गांधी का लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बड़ा बयान, आरएसएस और ‘समानता’ के मुद्दे पर संसद में हंगामा

सदन में बोले राहुल गांधी

राहुल गांधी का लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बड़ा बयान, आरएसएस और ‘समानता’ के मुद्दे पर संसद में हंगामा

लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण से जुड़ी टिप्पणियों पर हंगामा हो गया। उन्होंने आरएसएस, गांधी और संवैधानिक संस्थाओं का उल्लेख किया, जिस पर सत्तापक्ष ने आपत्ति जताई। मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें विषय पर रहने की सलाह दी।

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में विषय से हटकर आरएसएस, महात्मा गांधी, नाथूराम गोडसे और संवैधानिक संस्थाओं का उल्लेख करना शुरू किया। इस पर सत्तापक्ष ने आपत्ति जताई और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें विषय पर केंद्रित रहने की सलाह दी।

चर्चा की शुरुआत चुनाव आयोग द्वारा कई राज्यों में किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास को लेकर हुई थी। विपक्षी दल लंबे समय से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए इस मुद्दे पर संसद में बहस की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की त्रुटि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सकती है।

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने देश को “ताना-बाना” बताते हुए कहा कि भारत 1.4 अरब लोगों से बना एक सामाजिक कपड़े की तरह है, जो वोट के धागों से बुना गया है। उन्होंने कहा, “अगर वोट सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाएं भी सुरक्षित नहीं रहेंगी।” इसके आगे राहुल गांधी ने कहा, देश की संस्थाएं वोट की शक्ति से ही अस्तित्व में आई हैं, और इसीलिए चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरएसएस का हवाला देते हुए कहा कि संगठन समानता के विचार से असहज महसूस करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस पदानुक्रम में विश्वास रखता है और खुद को सबसे ऊपर मानता है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस संवैधानिक संस्थाओं पर प्रभाव बढ़ाना चाहता है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन कमजोर हो सकता है। अपने वक्तव्य में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या एक ऐतिहासिक सच्चाई है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश की संस्थाएं और लोकतांत्रिक ढांचा वोट की नींव पर खड़ा है, इसलिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है।

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उन्होंने खादी का उदाहरण देते हुए कहा कि खादी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत के लोगों की भावना और अभिव्यक्ति है। उनके अनुसार, गांधीजी द्वारा खादी को अपनाना एक सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश था, जो देश की आत्मा से जुड़ा हुआ था। इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से लगातार हंगामा होता रहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष के नेता विषय से भटक रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे अपनी बात चुनाव सुधारों तक सीमित रखें।

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इस पूरे घटनाक्रम के बाद सदन में भारी शोर-शराबा देखने को मिला। हालांकि, चुनाव सुधारों और मतदाता सूची की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा जारी रहने की संभावना है, क्योंकि यह विषय सभी दलों के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

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