सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला, बोले- गांधी परिवार ने देश की बर्बादी पर सत्ता की इमारत बनाई
राजनीतिक विफलताओं का दिया हवाला
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर लूट, समाज में विभाजन और भारतीय धर्म एवं संस्कृति के प्रति मन में नफरत रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि गांधी परिवार ने देश की बर्बादी की बुनियाद पर अपनी सत्ता की इमारत तैयार की है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सत्ता से बाहर रहने पर पानी से बाहर की मछली की तरह छटपटा रही है और किसी भी तरह से उसे वापस पाने की कोशिश कर रही है। दुर्भाग्य से इस तरह की सोच वाली कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथ में हैं। यह दुर्भाग्य देश से ज्यादा कांग्रेस के लिए है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सरदार वल्लभभाई पटेल को उनका हक न देकर अपनी राजनीतिक शक्ति बनाई और शून्य मत मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री बन गये। पंडित नेहरू के कार्यकाल में, देश ने बंटवारा देखा, जो इंसानी इतिहास के सबसे खूनी चैप्टर्स में से एक था। त्रिवेदी ने कहा कि पंडित नेहरू 15 अगस्त, 1947 को नहीं, बल्कि दो सितंबर, 1946 को अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री बने थे और उनके कार्यकाल में देश का बंटवारा हुआ। इसके बाद इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी को बांटने के बाद अपनी ताकत मजबूत की।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने नीलम संजीव रेड्डी से जुड़े राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपने सांसदों से कांग्रेस की आधिकारिक स्थिति के खिलाफ वोट करने को कहा, जिससे पार्टी बंट गयी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, 1984 में दिल्ली में सिखों के नरसंहार के बीच राजीव गांधी सत्ता में आए। सिख विरोधी हिंसा एक नवंबर, 1984 को शुरू हुई थी। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, कांग्रेस अब उसी तारीख को दिल्ली में प्रदर्शन करने की योजना बना रही है और मेरा मानना है कि वह शहर को 1984 में देखी गई अराजकता की याद दिलाना चाहती है।
उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस समय वह देश से बाहर चले गये हैं और सूत्रों के अनुसार, चंपा में भटक रहे हैं। वह देश और कांग्रेस दोनों के लिए पहेली बन गये हैं। भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रिकॉर्ड शानदार और उपलब्धियों से भरा रहा है, जबकि राहुल गांधी का रिकॉर्ड कांग्रेस के लिए समस्याओं से भरा रहा है। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के भीतर कई तरह के प्रयोग किए। उन्होंने कहा था कि युवा कांग्रेस के चुनावों का लोकतंत्रीकरण किया जाएगा, लेकिन इसके बाद पूरे देश ने देखा कि युवा कांग्रेस में भीड़तंत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शिखर सम्मेलन में नग्न प्रदर्शन के अलावा कोई लोकतंत्रीकरण नहीं हुआ।
त्रिवेदी ने कहा कि बराक ओबामा ने अपनी पुस्तक 'ए प्रॉमिस्ड लैंड' में 2010 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अध्याय 24 में लिखा था, राहुल गांधी में घबराहट और अपरिपक्वता झलकती थी। ऐसा लगता था, जैसे वह कोई ऐसा छात्र हो, जिसने पाठ्यक्रम तो पूरा कर लिया हो और शिक्षकों को प्रभावित करने के लिए उत्सुक हो, लेकिन गहराई में उस विषय में महारत हासिल करने की न तो योग्यता रखता हो और न ही जुनून।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कमजोर करने और उसे 140 वर्षों के इतिहास में उसके सबसे निचले स्तरों में से एक पर पहुंचाने के बाद अब राहुल गांधी देश की संस्थाओं और व्यवस्थाओं को कमजोर करके खुद को स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार कहा था कि विफल उत्पाद (फेल प्रोडक्ट) को बार-बार लॉन्च करने के लिए कांग्रेस ने आज सिर्फ अपनी पार्टी को नहीं, बल्कि देश की संवैधानिक व्यवस्था को भी दांव पर लगा दिया है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी किस तरह से विफल उत्पाद हैं, इसे वह तत्थों के साथ साबित करते हैं। उन्होंने कहा, दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में जब उनका दाखिला हुआ था, वह निशानेबाजी के एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के रूप में हुआ था. लेकिन उसके बाद उनका निशाना ऐसा चूका कि सारे निशाने ही चूकते जा रहे हैं। यह है उनकी पहली विफलता। इसके बाद वह अपनी खानदानी परंपरा का निर्वाह करते हुए इंग्लैंड पढ़ने चले गए। फिर उन्होंने 1996-99 के बीच एक ब्रिटिश कंपनी में नौकरी की, जो बंद हो गयी। मतलब आप सोचिए कि कितना महत्वपूर्ण उत्पाद हैं कि जहां-जहां चरण पड़े राहुल के, तहां-तहां हुआ बंटाधार।
उसके बाद बड़े कांग्रेस ने 2014 में उन्हें अपना अघोषित नेता बनाया और कांग्रेस अपनी सर्वकालिन निम्न संख्या पर लोकसभा में पहुंची।
त्रिवेदी ने कहा, राहुल गांधी ने फिर अगला प्रयोग किया और कहा कि हम वंशवादी राजनीति को समाप्त करेंगे, लेकिन आज स्थिति ये है कि कांग्रेस के इतिहास में नेहरू-गांधी परिवार के तीनों सदस्य (मां-बेटा और बेटी) संसद में हैं।

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