हाईकोर्ट का बड़ा आदेश : समान तबादला नीति बनाने को पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित

ट्रांसफर की शक्ति असीमित भी नहीं

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश : समान तबादला नीति बनाने को पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित
राजस्थान हाईकोर्ट ने 468 तबादला याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पूर्व जज आलोक शर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश। कमेटी दो माह में समान तबादला नीति सरकार को सौंपेगी। सभी विभागों में सात दिन में शिकायत समितियां बनाने को कहा।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अफसरों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर होने को गंभीरता से लिया है। अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व जज आलोक शर्मा की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं।

यह कमेटी व्यापक और समान तबादला नीति बनाकर दो माह में राज्य सरकार के समक्ष रखेगी। कमेटी में महाधिवक्ता और मुख्य सचिव को भी शामिल करने को कहा गया है। जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश तबादलों से जुड़ी 468 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।

अदालत ने सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए सभी संबंधित विभागों में सात कार्य दिवस में ट्रांसफर शिकायत समितियां गठित करने का भी निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए उनके ट्रांसफर आदेशों की क्रियान्विति पर फिलहाल रोक लगा दी। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश जयपाल रातावल अन्य की याचिकाओं पर दिए।

याचिका से जुड़े अधिवक्ता रामप्रताप सैनी और अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मालपुरा ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि तबादला नीति में कर्मचारियों के कार्यकाल, समय पूर्व स्थानांतरण, काउंसलिंग, पति-पत्नी के मामले, मेडिकल, दिव्यांगता, सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारी, विधवा, तलाकशुदा कर्मचारी, दुर्गम क्षेत्रों में सेवा, पारदर्शिता, स्थानांतरण प्राधिकारी, अभ्यावेदन की प्रक्रिया और बार-बार होने वाले मनमाने स्थानांतरण से सुरक्षा इत्यादि को भी शामिल करने के लिए कहा है।

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ट्रांसफर की शक्ति असीमित भी नहीं :

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अदालत ने रेट की प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए राज्य सरकार को संक्रमणकालीन व्यवस्था के तौर पर हाईकोर्ट के रिटायर जज की नियुक्ति के लिए तत्काल कदम उठाने और खाली पदों को भरने न्यायिक सदस्यों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है। हालांकि अदालत ने कहा कि तबादला सेवा का सामान्य हिस्सा ही है और कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर बने रहने का कानूनी अधिकार नहीं है, लेकिन ट्रांसफर की शक्ति असीमित भी नहीं है। यदि ट्रांसफर दुर्भावनापूर्वक, मनमाना सक्षम अधिकारी के बिना वैधानिक तौर पर नियम के खिलाफ किया गया है तो अदालत उसकी न्यायिक समीक्षा कर सकता है।  अदालत ने याचिकाकर्ताओं को कहा कि वे 15 दिन में सभी दस्तावेजों सहित अपने सक्षम अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन दें। सक्षम अधिकारी अभ्यावेदन प्राप्त होने से 15 दिन की अवधि में प्रार्थी को सुनवाई का पूरा मौका देते हुए उसका निस्तारण करेंगे। यदि किसी प्रार्थी के खिलाफ केवल नए स्थान पर ज्वाइन नहीं करने के कारण अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई है, तो सक्षम अधिकारी को आगे कार्रवाई करने से पहले कर्मचारी के अभ्यावेदन और उस पर लिए गए निर्णय को ध्यान में रखना होगा।

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