जीरो एफआईआर के मुद्दे में उलझी रही कांग्रेस तो पंचायत चुनाव की तैयारी पर उठे सवाल
कार्यकर्ताओं के समन्वय में आ सकती है बड़ी बाधा
जयपुर। रितु बराल से जुड़ी जीरो एफआईआर दर्ज कराने के मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के पुलिस कमिश्नरेट में लगातार जुटे रहने से पार्टी की पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसे समय में यदि प्रदेश नेतृत्व लंबे समय तक एक ही मुद्दे पर केंद्रित रहता है, तो चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य वरिष्ठ नेता इस मामले में पुलिस पर एफआईआर दर्ज करने का दबाव बना रहे हैं।
सवाल यह है कि एक तरफ पार्टी की पूरी फ्रंट लीडरशिप इस मुद्दे पर संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पंचायत चुनाव की रणनीति और जमीनी तैयारियों की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है। जीरो एफआईआर दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में यदि पुलिस पर इसे दर्ज करने से इनकार करने के आरोप लग रहे हैं तो कांग्रेस इसे कानून और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बनाकर उठा रही है। पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के चयन, कार्यकर्ताओं के समन्वय, स्थानीय समीकरणों और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए लगातार सक्रियता जरूरी है।
कांग्रेस नेताओं की व्यस्तता का लाभ उठाने की जुगत में भाजपा
राजनीतिक नजरिए से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस को इस मुद्दे में उलझे रहने से भाजपा को चुनावी बढ़त मिल सकती है। इसे भाजपा की सोची समझी रणनीति मानने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं।

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