गैराज में गूंजे शिक्षा के स्वर, सात बच्चों से 304 तक पहुंचा सफर
शिक्षा से आवास तक, दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है बाधित बाल विकास केंद्र
कोटा। किसी के लिए गैराज गाड़ी खड़ी करने की जगह हो सकता है, लेकिन कोटा में एक परिवार ने इसी गैराज को दिव्यांग बच्चों के सपनों की पहली पाठशाला बना दिया। वर्ष 1975 में सात बच्चों और एक शिक्षक से शुरू हुआ यह प्रयास आज 304 बच्चों की शिक्षा और आवास से जुड़ा है। झालावाड़ रोड, विज्ञान नगर स्थित बाधित बाल विकास केंद्र की कहानी बताती है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा संवेदनशील सोच और सेवा का संकल्प जरूरी है।
एक शिक्षक की परेशानी से हुई शुरुआत
केंद्र की अध्यक्ष सर्वेश्वरी रानीवाला बताती हैं कि इस पहल की शुरुआत उनके दादा ससुर गणेशी लाल रानीवाला ने की थी। उस समय एक शिक्षक दिव्यांग बच्ची को पढ़ाने जाते थे। उनके मन में विचार आया कि ऐसे अन्य बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ा जाए। धीरे-धीरे कुछ बच्चे पढ़ने आने लगे, लेकिन बच्ची की शादी के बाद उसके परिवार ने आर्थिक कारणों से फीस देना बंद कर दिया। इससे शिक्षक के सामने रोजगार और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया।ऐसे समय में गणेशी लाल रानीवाला ने अपना खाली गैराज बच्चों की कक्षा के लिए उपलब्ध करा दिया और शिक्षक को वेतन देने की जिम्मेदारी भी उठाई। इस तरह सात बच्चों से शुरू हुई पाठशाला आगे चलकर बाधित बाल विकास केंद्र के रूप में विकसित हुई। यह पहल उस सोच का उदाहरण बनी, जिसमें बच्चों की शारीरिक सीमाओं के बजाय उनकी क्षमताओं को पहचानने पर जोर दिया गया।
50 साल में बदली तस्वीर, 304 बच्चों को संबल
पांच दशक से अधिक समय बाद केंद्र की यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। सर्वेश्वरी रानीवाला के अनुसार, वर्तमान में यहां 304 बच्चों के लिए स्कूल और हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2013 से केंद्र की जिम्मेदारी संभाल रहीं सर्वेश्वरी इस सेवा परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।केंद्र का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनने के अवसर देना और समाज से जोड़ना भी है। शिक्षा के माध्यम से बच्चे अपनी क्षमताओं को पहचान सकें और सम्मान के साथ जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ें, यही इस प्रयास का मूल भाव है।
एक कमरे से शुरू हुआ बेटियों का नया अध्याय
दिव्यांग बालिकाओं के लिए अलग आवास की जरूरत को देखते हुए वर्ष 2023 में करणी नगर में एक कमरे से बालिका हॉस्टल की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य बेटियों को सुरक्षित आवास के साथ शिक्षा जारी रखने और आगे बढ़ने का अवसर देना है। आज इस प्रयास के तहत 50 बालिकाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।यह पहल बताती है कि सीमित संसाधनों में भी किसी बड़ी जरूरत को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। बालिकाओं के लिए शिक्षा, देखभाल और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है।
सेवा की सोच बनी प्रेरणा
गणेशी लाल रानीवाला ने उस समय केवल एक शिक्षक को गैराज नहीं दिया था, बल्कि सात बच्चों की शिक्षा जारी रखने का रास्ता खोला था। आज वही सोच सैकड़ों बच्चों और बालिकाओं के जीवन में उम्मीद जगाने का माध्यम बन रही है।गैराज से शुरू हुई यह यात्रा संदेश देती है कि किसी बच्चे का भविष्य बदलने के लिए शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका प्रभाव पीढ़ियों तक पहुंच सकता है। जरूरत है तो बस संवेदनशीलता, सहयोग और हर बच्चे को सीखने का समान अवसर देने के संकल्प की।

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