बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री ऑनलाइन खोजना भी अपराध, साइबर पुलिस की एडवाइजरी
डिलीट करने के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड
जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (आरफॉरसी) ने बच्चों के यौन शोषण व दुर्व्यवहार से संबंधित सामग्री (सीएसएएम) के ऑनलाइन प्रसार को लेकर जनहित में एडवाइजरी जारी की है। डीजीपी राजीव शर्मा के निर्देश पर जारी एडवाइजरी में बताया है कि बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री को इंटरनेट पर खोजना, देखना, बनाना, डाउनलोड करना या शेयर करना गंभीर और दंडनीय अपराध है। एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने कहा कि सीएसएएम सामान्य एडल्ट कंटेंट नहीं बल्कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों का डिजिटल दस्तावेज है। इसमें बच्चे की सहमति कानूनन मान्य नहीं है।
डिलीट करने के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड
साइबर पुलिस के अनुसार ऐसी सामग्री को सर्च, देखने या डाउनलोड करने से इसकी मांग बढ़ती है और अपराधियों को बच्चों के शोषण का अवसर मिलता है। इंटरनेट पर सीएसएएम सर्च करने या सोशल मीडिया ग्रुप में प्राप्त होने पर डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज हो सकता है, जो फाइल डिलीट करने के बाद भी फॉरेंसिक रिकॉर्ड में सुरक्षित रहता है।
सामग्री मिले तो आगे न बढ़ाएं
पुलिस ने कहा है कि ऐसी तस्वीर, वीडियो या लिंक मिलने पर उसे किसी व्यक्तिया ग्रुप में फॉरवर्ड नहीं करें। सबूत जुटाने के नाम पर स्क्रीनशॉट भी न लें और सामग्री को फोन, कंप्यूटर या क्लाउड में सेव न करें। इसके बजाय तुरंत पुलिस को सूचित करें। गुमनाम रिपोर्टिंग का विकल्प भी उपलब्ध है। जांच में मदद के लिए यूआरएलए यूजरनेम और समय की जानकारी नोट रखी जा सकती है।
बच्चों को भी करें जागरूक
पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों को सेफ टच और अनसेफ टच की जानकारी देने तथा अजनबियों से फोटो साझा नहीं करने के लिए जागरूक करने की अपील की है। सहायता के लिए 1930, बाल हेल्पलाइन 1098, साइबर हेल्पडेस्क 9256001930 और 9257510100 पर संपर्क किया जा सकता है। एडीजी सिंह ने बताया कि चाइल्ड पोर्नोगाफी सेक्शन 15 के तहत कम से पांच साल सजा का प्रावधान है।

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