Voice of Youth : हादसे में तमाशबीन नहीं, मददगार बनें; हर मिनट कीमती, हर जान अनमोल
हादसे के बाद राहत में देरी की हो निष्पक्ष जांच, लापरवाही पर तय हो जवाबदेही
कोटा।सड़क हादसे में घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना सिर्फ पुलिस, प्रशासन या चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबका सामाजिक दायित्व है। यदि एंबुलेंस या पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, तो आमजन को भी संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद के लिए आगे आना चाहिए लेकिन अफसोस, हादसे के वक्त कई लोग मदद का हाथ बढ़ाने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर डालने में जुट जाते हैं। सिमलिया थाना क्षेत्र में टोल नाके के पास हुए हादसे में मृतक के करीब एक घंटे तक सड़क पर पड़े रहने की बात सामने आने के बाद राहत व्यवस्था और आमजन की भूमिका पर सवाल उठे हैं। दैनिक नवज्योति के ह्यवॉइस ऑफ यूथह्ण अभियान के तहत युवाओं ने कहा कि हादसे के बाद राहत पहुंचाने में संभावित देरी की जांच होनी चाहिए, सड़क के गड्ढे दुरुस्त किए जाएं और जिम्मेदारी तय की जाए। युवाओं का संदेश है कि हादसे के वक्त तमाशबीन बनने के बजाय मददगार बनें, क्योंकि घायल को वीडियो नहीं, समय पर इलाज और इंसानी संवेदना की जरूरत होती है।
प्रशासन समय पर पहुंचता तो शायद बच सकती थीं जानें!
सड़क हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और चिकित्सा विभाग की तत्परता बेहद जरूरी है। टोल नाके के पास हुए हादसे में राहत पहुंचने में देरी की बात सामने आई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित से स्पष्टीकरण लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सड़क पर बने गड्ढों को दुरुस्त करने की जरूरत भी बताई, ताकि हादसों का खतरा कम हो सके।जवाबदेही तय होगी, तभी व्यवस्था में सुधार आएगा।
-हिमांशु नागर, कॉलेज स्टूडेन्ट
हादसे की सूचना किसने दी, मदद पहुंचने में देरी क्यों हुई?
सड़क हादसे के बाद पुलिस और एंबुलेंस को तत्काल सूचना देना हमारी भी जिम्मेदारी है। केवल सड़क पर तमाशा देखना व वीडियो बनाना सही नहीं है। यदि एम्बुलेंस समय पर नहीं आती है तो हमे उसे अस्पताल पहुंचाने के प्रयास करना चाहिए। साथ ही यदि संबंधित विभागों को समय पर सूचना मिल गई थी, तो मदद पहुंचने में देरी क्यों हुई, इसकी जांच होनी चाहिए। घायलों को समय पर उपचार मिलता तो उनके बचने की संभावना पर असर पड़ सकता था, हालांकि इसका आकलन चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
-हेमंत मीणा, कॉलेज स्टूडेंट
हर हादसे के लिए हो विशेष राहत टीम, ताकि मदद में न हो देरी
सड़क हादसों के बाद राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए विशेष राहत टीम गठित करना चाहिए। टीम में पुलिस, चिकित्सा विभाग और जरूरत के अनुसार अन्य संबंधित कर्मियों को शामिल किया जाए। हादसे की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचे और घायलों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें। इससे राहत कार्य में समन्वय बढ़ेगा और मदद पहुंचाने में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा। व्यवस्था ऐसी हो कि घायल को मदद के इंतजार में सड़क पर असहाय न रहना पड़े।
-प्रियांशु मीणा, कॉलेज स्टूडेन्ट
मोबाइल कैमरे बंद कर मदद के लिए हाथ बढ़ाएं
सड़क हादसे के बाद घायल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना समाधान नहीं है। सबसे पहले पुलिस और 108 एंबुलेंस को सूचना देकर घायल तक मदद पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। हर स्थिति में केवल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। आमजन की भी जिम्मेदारी है कि जरूरत के समय मदद के लिए आगे आएं। यदि संबंधित विभाग समय पर सहायता नहीं पहुंचाते या लापरवाही सामने आती है, तो शिकायत कर जवाबदेही तय कराने की मांग की जानी चाहिए।
-इरम खान, कॉलेज स्टूडेंट

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