जयपुर की 160 गृह निर्माण सहकारी समितियों पर सहकारिता विभाग का शिकंजा, 67 समितियों पर कार्रवाई की तैयारी
पीड़ितों की शिकायतों को भी कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा
जयपुर। राजधानी में गृह निर्माण सहकारी समितियों के जरिए जमीन कारोबार और आम लोगों से जुड़े पुराने मामलों को लेकर सहकारिता विभाग ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। जयपुर की करीब 160 गृह निर्माण सहकारी समितियों की स्थिति की समीक्षा में सामने आया है कि इनमें केवल 93 समितियां ही सक्रिय रूप से संचालित हैं। शेष 67 समितियों पर डिफॉल्टर, निष्क्रियता और अवसायन जैसी कार्रवाई का शिकंजा कस रहा है। विभाग की ओर से समितियों के रिकॉर्ड, ऑडिट और उपलब्ध वित्तीय जानकारी की लगातार जांच की जा रही है। जिन समितियों ने रिकॉर्ड और ऑडिट से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी है। वहीं गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और लंबे समय से निष्क्रिय समितियों का पंजीकरण निरस्त करने का अभियान भी तेज किया जा रहा है। वर्षों से बंद पड़ी समितियों के पुराने रिकॉर्ड खंगालकर उनकी जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू हो गई है।
विभाग विशेष रूप से उन मामलों की भी पड़ताल कर रहा है, जिनमें गृह निर्माण समितियों के नाम पर जमीन के लेन-देन में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। पीड़ितों की शिकायतों को भी कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा है। पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलकर रिकॉर्ड, पदाधिकारियों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। विभाग का फोकस ऐसी समितियों पर है, जहां सदस्यों के हित प्रभावित हुए हैं या जमीन कारोबार में नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं।

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