अरावली पर्वतमाला को सेंसिटिव इकोलॉजिकल जोन घोषित करने की मांग : मीडिया से बातचीत करते हुए चिब ने कहा- अरावली रेंज को खत्म नहीं होने देंगे, यह हमारी संस्कृति का प्रतीक
उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार कर सकती है हेरा फेरी
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने सुप्रीम कोर्ट से अरावली पर्वतमाला को सेंसिटिव इकोलॉजिकल जोन घोषित करने की मांग की। पीसीसी में मीडिया से बातचीत करते हुए चिब ने कहा कि अरावली मुद्दे पर अपने उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार हेरा फेरी कर सकती है, इसीलिए हम सबको सतर्क रहने की जरूरत।
जयपुर। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने सुप्रीम कोर्ट से अरावली पर्वतमाला को सेंसिटिव इकोलॉजिकल जोन घोषित करने की मांग की है। पीसीसी में मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए चिब ने कहा कि अरावली मुद्दे पर अपने उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार हेरा फेरी कर सकती है, इसीलिए हम सबको सतर्क रहने की जरूरत है। हम अरावली रेंज को खत्म नहीं होने देंगे, क्योंकि यह हमारी संस्कृति का प्रतीक है और इसकी लड़ाई लड़ने के लिए हम पूरी तरीके से तैयार हैं। चिब ने आरोप लगाया कि इन्होंने देश के प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों को ही बेचना शुरू कर दिया है और यह सिर्फ अपने उद्योगपति मित्र के लिए किया जा रहा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई जंगल अपने उद्योगपति मित्र को दे दिए, लेकिन उत्तर भारत के लोगों का धन्यवाद है जिन्होंने अरावली बचाने के लिए सरकार का विरोध किया। अरावली क्षेत्र डेढ़ अरब वर्ष से भी पुराना है, जिसको यह सरकार खत्म करना चाह रही थी।
इसके लिए 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों को अरावली क्षेत्र से बाहर करने का प्रपोजल सुप्रीम कोर्ट में बना कर दे दिया. अरावली की 90 प्रतिशत पहाड़ियां 100 मीटर से कम ऊंचाई की हैं। पहले अवैध खनन पर नजर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधीन एक कमेटी होती थी। इस सरकार ने उस कमेटी को खत्म करके अपनी नई कमेटी बना दी, जिसने सुप्रीम कोर्ट में 100 मीटर से कम ऊंचाई की पहाड़ियों को अरावली के दायरे से बाहर करने का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। राजस्थान और देश की जनता इस फैसले के विरोध में उतर आई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी ही अपने फैसले पर रोक लगा दी। अब 21 जनवरी को इसकी सुनवाई होगी।चिब ने केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पहले वे कह रहे थे कि ऐसा कुछ भी नहीं है। कांग्रेस पार्टी देश की जनता को गुमराह कर रही है, लेकिन अब उनका झूठ सामने आ चुका है। उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। कोर्ट में सुनवाई होने थ हम इस मामले में भाजपा सरकार की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि 7 जनवरी से 20 जनवरी तक अरावली को लेकर राजस्थान के तमाम जिलों में हमारी पदयात्राएं और रैलियां होनी थीं, लेकिन अब 21 जनवरी का इंतजार है।
इसके बाद ही हम आगे की रैलियां और नुक्कड़ सभाएं करेंगे, यह कार्यक्रम रुकने वाले नहीं है। अरावली क्षेत्र में आने वाले 20 जिलों में यह कार्यक्रम निरंतर चलते रहेंगे चिब ने अरावली आंदोलन में साथ देने वाले सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन और आम जनता का धन्यवाद देते हुए कहा कि सबने इस मुद्दे पर मुखर होकर सरकार का विरोध किया। मनरेगा को लेकर कहा कि मनरेगा पर आंदोलन का निर्णय कांग्रेस कमेटी की ओर से किया जाएगा। अभी उसकी तारीख तय नहीं हुई है, जैसे ही निर्देश मिलेंगे हम राजस्थान सहित पूरे देश में मनरेगा को लेकर नुक्कड़ सभाएं और बड़े आंदोलन करेंगे।

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