राजस्थान सरकार और गर्ल इफेक्ट ने एचपीवी टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘टीका टॉक' की शुरुआत की
व्हाट्सएप चैटबॉट भी लॉन्च
जयपुर। राजस्थान सरकार ने गर्ल इफेक्ट इंडिया के सहयोग से आज ‘टीका टॉक’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य ह्यूमन पैपिलोमा विषाणु (एचपीवी) के टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाना और माता-पिता, तथा किशोरियों तक आसान भाषा में भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है। इस पहल की शुरुआत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राजस्थान सरकार के मिशन निदेशक डॉ. मधु राटेश्वर की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक के दौरान की गई। बैठक में राज्य में एचपीवी टीकाकरण को लेकर बेहतर जन-जागरूकता, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
राजस्थान सरकार अपनी बेटियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसके तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 14–15 साल की लड़कियों को एचपीवी का टीका निःशुल्क लगाया जा रहा है। एचपीवी टीकाकरण, बचपन और किशोरावस्था में लगाए जाने वाले दूसरे जरूरी टीकों की तरह, उन एचपीवी संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकता है, जो भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों का कारण बनते हैं। भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। 2024 में 78,499 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पहचान हुई और 42,392 महिलाओं की इससे जान गई। लड़कियों को सही उम्र में एचपीवी का टीका लगाना उन्हें आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर से बचाने का एक महत्वपूर्ण मौका है।
आज परिवारों तक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी कई माध्यमों से पहुंचती है। इसके साथ ही गलत और भ्रामक जानकारी भी तेजी से फैलती है। ऐसे में माता-पिता और किशोरियों को एचपीवी, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर और एचपीवी टीकाकरण से जुड़ी सही, भरोसेमंद और आसानी से समझ आने वाली जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। ‘टीका टॉक’ इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक पहल है। इसके तहत विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और माता-पिता के साथ बातचीत की जाएगी। इसके अलावा टीका टॉक एक व्हाट्सऐप चैटबॉट के माध्यम से एचपीवी टीकाकरणऔर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़े आम सवालों के सरल और भरोसेमंद जवाब उपलब्ध कराए जाएंगे।
लॉन्च के अवसर पर राजस्थान सरकार के एचपीवी की निदेशक डॉ. मधु राटेश्वर ने कहा, “प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत राजस्थान से की है और यह हमारे लिए देश के सामने नेतृत्व करने और एक उदाहरण स्थापित करने का अवसर है। राजस्थान यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर पात्र किशोरी और उसके परिवार को एचपीवी वैक्सीनेशन से जुड़े सही और जरूरी जानकारी एवं सहयोग मिले, ताकि वे इस बारे में सही और जागरूक निर्णय ले सकें।”
इस पहल में विद्यालयों और माता-पिता की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। एचपीवी टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों का भरोसा मजबूत करने में परिवार, शिक्षक और समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में टीकाकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रघुराज सिंह ने कहा, “भारत में सर्वाइकल कैंसर आज भी हजारों महिलाओं की जान ले रहा है। आज हमारे पास एक ऐसा टीका है, जो उन एचपीवी संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकता है, जो सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों का कारण बनते हैं। हम माता-पिता से अपील करते हैं कि अपनी 14 साल की बेटियों को तुरंत एचपीवी का टीका लगवाएं और उन्हें वह सुरक्षा दें, जो एचपीवी टीकाकरण प्रदान कर सकता है। जिस तरह माता-पिता यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके बच्चों को दूसरे जरूरी टीके लगें, उसी तरह सही उम्र में एचपीवी का टीका लगवाना भी लड़कियों को भविष्य में सर्वाइकल कैंसर से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। “
गर्ल इफेक्ट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर कविता अय्यागरी ने कहा, “आज माता-पिता ऐसे माहौल में स्वास्थ्य से जुड़े फैसले ले रहे हैं, जहां उनके पास बहुत सारी जानकारी उपलब्ध है, लेकिन हर जानकारी भरोसेमंद नहीं होती। एचपीवी टीकाकरण की बात करें तो परिवारों को केवल जानकारी नहीं, बल्कि ऐसी जानकारी चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें और जिसे वे अपनी भाषा में आसानी से समझ सकें। ‘टीका टॉक’ का उद्देश्य यही है—लोगों के सवालों के आसान और भरोसेमंद जवाब उनकी पहुंच में लाना।”
राजस्थान में ‘टीका टॉक’ की शुरुआत एचपीवी टीकाकरण को लेकर बेहतर समन्वय और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जयपुर, दौसा और कोटपूतली से मिले जिला स्तर के सुझावों ने आगे की योजना तैयार करने में मदद की। आगे के चरण में विभिन्न विभागों और जिलों के बीच बेहतर समन्वय के साथ इस पहल को लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही विद्यालयों और माता-पिता की भागीदारी को मजबूत करने तथा टीके के लिए पात्र किशोरियों और उनके परिवारों तक एचपीवी टीकाकरण से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।

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