धारा 90-ए के मामलों में सरकार ने किया कार्यक्षेत्र स्पष्ट, अब विकास प्राधिकरण और नगर निकायों की तय होगी जिम्मेदारी
संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की
जयपुर। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने धारा 90-ए के तहत कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनार्थ सम्परिवर्तन और ले-आउट प्लान अनुमोदन के मामलों में विकास प्राधिकरणों, नगर विकास न्यासों और नगरीय निकायों के कार्यक्षेत्र को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। इसके तहत अलग-अलग परिस्थितियों में संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी तय की गई है। आदेश के अनुसार, विकास प्राधिकरण या नगर विकास न्यास के क्षेत्राधिकार में आने वाले नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में हस्तांतरित कॉलोनियों तथा आबादी भूमि को छोड़कर शेष भूमि के धारा 90-ए और ले-आउट अनुमोदन संबंधी प्रकरणों का निस्तारण विकास प्राधिकरण या न्यास करेगा।
वहीं, नए शामिल नगर परिषद और पालिका क्षेत्रों में मास्टर प्लान अधिसूचित होने पर नगरीकरण योग्य क्षेत्र के मामलों का निस्तारण संबंधित निकाय करेगा, जबकि इससे बाहर के क्षेत्र की जिम्मेदारी प्राधिकरण या न्यास की होगी। मास्टर प्लान अधिसूचित नहीं होने पर नगर परिषद या पालिका के सक्षम अधिकारी इन मामलों का निस्तारण करेंगे। प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में शामिल शेष नए राजस्व गांवों के मामलों का निस्तारण विकास प्राधिकरण या न्यास करेगा। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार परीक्षण और सक्षम स्तर से अनुमोदन के बाद प्रकरणों के निस्तारण के निर्देश दिए हैं।

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