सड़कों पर मोबाइल उपयोग का खौफनाक सच, हादसों में 25 घर उजड़े और 52 लोग हुए लहूलुहान
वाहन चलाते समय फोन के इस्तेमाल से हुए 45 हादसे
जयपुर। पुलिस मुख्यालय की 2025 की नवीनतम सड़क सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने से प्रदेश में 45 भीषण हादसे हुए, जिनमें 25 की मौत हो गई। इस बेहद डरावने सच में मृत्यु दर 55.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आंकड़ों के अनुसार मोबाइल के कारण होने वाले हर दूसरे हादसे में मौत निश्चित है। इसके साथ ही सड़कों पर अकेले ओवर-स्पीडिंग के कारण सबसे ज्यादा 19128 हादसे हुए, जिनमें 9671 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
केस स्टडी 1 (स्क्रीन डिस्ट्रेक्शन)
जयपुर-अजमेर हाईवे पर 120 किमी घंटे की रफ्तार से चल रही कार में अमित शर्मा (32) अपनी कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच और मोबाइल पर आए एक व्हाट्सएप नोटिफिकेशन को देखने के लिए महज 3 सेकंड के लिए भटके। इसी 3 सेकंड के क्रिटिकल ब्लाइंड स्पॉट में कार सामने खड़े ट्रेलर में जा घुसी। अमित की मौके पर ही मौत हो गई। वर्ष 2023 में मोबाइल का उपयोग करते हुए 41 हादसे हुए जिनमें 45 जनों की मौत हो गई। इन हादसों में कुल 75 जने घायल हुए थे। वर्ष 2024 में वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग करने से 11 हादसे हुए इनमें 11 जनों की मौत और कुल 24 जने घायल हुए।
केस स्टडी 2 (कॉलिंग डेंजर)
बाइक सवार रमेश कुमार (26) अपने कान और हेलमेट के बीच मोबाइल फंसाकर फोन पर बात कर रहे थे। एक तीखे मोड़ पर कॉल पर ध्यान होने के कारण वे सामने से आ रही बस का हॉर्न नहीं सुन सके और सीधे पहिए के नीचे आ गए।
केस स्टडी 3 (ओवर स्पीडिंग की बलि)
एक्सप्रेसवे पर अपनी नई एसयूवी की रफ्तार का टेस्ट कर रहे सुनील मीणा की गाड़ी का टायर अधिक गति और घर्षण के कारण फट गया। गति सीमा से दोगुनी रफ्तार होने के कारण गाड़ी 5 बार पलटी और सुनील ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया।
हादसों को रोकने के लिए एक्शन प्लान आमजन के स्तर पर
डिजिटल डिटॉक्स मोड: वाहन चालू करते ही मोबाइल को ड्राइविंग मोड या साइलेंट पर डालें।
गति सीमा: स्पीड लिमिट बोर्ड को निर्देश समझें, चुनौती नहीं।
सुरक्षा चक्र: पीछे बैठने वाले भी हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग करें।
प्रशासनिक स्तर पर (स्मार्ट गवर्नेंस)
एआई-कैमरा सर्विलांस-प्रत्येक हाईवे और मुख्य मार्ग पर एआई सर्च और डार्क कैमरे लगाए जाएं जो बिना हेलमेट, सीट बेल्ट और हाथ में मोबाइल फोन पकड़ने वाले का तुरंत चालान काटें।
ब्लैक स्पॉट प्रेडिक्शन: पिछले तीन वषोंर् के डेटा के आधार पर एआई जनित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर कंक्रीट क्रैश बैरियर लगाए जाएं।

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