क्षेत्रीय सिनेमा में बसती है भारत की आत्मा! सितारों ने खोले दिल के राज, बोले- कहानियां वर्ल्ड क्लास तो मंच भी वैसा चाहिए
आज के दौर में दर्शक ही सबसे बड़ी ताकत
जयपुर। एक खास टॉक शो में जब देश के जाने-माने कलाकार क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत पर बोलने के लिए मंच पर आए, तो उनकी बातों ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। अभिनेता शरमन जोशी ने कहा कि भारत की जहां आत्मा बसती है, वहां की कहानी कहना सबसे बड़ा कर्म है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय फिल्में देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले दर्शकों को अपनी कहानियों से जोड़ रही हैं, और यही इनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को उच्च स्तरीय मंच और सुविधाएं देने की। उन्होंने सिंगल स्क्रीन थिएटरों को बचाने की जरूरत पर भी बल दिया, यह कहते हुए कि इन्हीं थिएटरों ने क्षेत्रीय फिल्मों को बड़ा बनाया है। वहीं, अभिनेत्री ईशा कोपिकर ने कहा कि आज के दौर में दर्शक ही सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण और सोशल मीडिया ने लोगों के देखने के तरीके और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि दर्शक को अब दो घंटे तक सीट पर बैठाए रखना लेखकों और फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने राजस्थान से अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक दक्षिण भारतीय फिल्म से की थी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं में काम करना भारत की असली ताकत है, और क्षेत्रीय सिनेमा का प्रभाव देश में हमेशा बना रहेगा।

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