गांवों के चुनाव की दो तस्वीरें : ‘पंचायती’ में बनते-बिगड़ते रिश्ते, सरपंची की चाह में रिश्ते तार-तार
जीत से बड़ी गांव की शांति
जयपुर। राजस्थान के चल रहे पंचायत चुनावों में ‘भाईचारे वाले’ गांवों की अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक तरफ लोगों पर राजनीति का ऐसा खुमार चढ़ा है कि वे रिश्तों का खून करने तक उतर आए। वहीं दूसरी तरफ गांव का भाईचारा बना रहे, मन में किसी तरह का मैल ना रहे इसके लिए गांव वालों ने हारे प्रत्याशी को पूरे गांव से जुटाकर 25 लाख रुपए तक दिए। नागौर के गांवों में हारे प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग देने की पहल सामाजिक सौहार्द का संदेश देती है, वहीं चूरू में चुनाव लड़ने की चाह में बेटे-बहू को मार देने की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं।
चूरू की घटना ने रिश्तों को लेकर झकझोरा :
चूरू जिले के चंगोई गांव में सरपंच का चुनाव लड़ने को लेकर पारिवारिक विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। पिता सरपांच का चुनाव लड़ना चाहते थे, बेटे-बहू ने विरोध किया तो बेटे-बहू को ही वाहन से कुचलकर मासर डाला। घटना ने चुनावी महत्वाकांक्षा के सामने पारिवारिक रिश्तों और विवेक के कमजोर पड़ने पर सवाल खड़े किए।
चुनाव में विवाद, बाद तक रिश्ते खराब :
पहले चरण के पंचायत चुनावों के दौरान प्रदेश के कई क्षेत्रों से विवाद और हिंसा की खबरें सामने आईं। जयपुर जिले के चौमूं क्षेत्र की मोरिजा ग्राम पंचायत में मतगणना के दौरान मतपेटियां बदले जाने की अफवाह के बाद भीड़ जुटी और पथराव हुआ। मौजमाबाद क्षेत्र में कथित फर्जी मतदान को लेकर प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच लाठी-डंडों और पत्थरों से संघर्ष की खबर आई। बीकानेर जिले की केला ग्राम पंचायत में परिणाम घोषित होने के बाद पथराव हुआ, जबकि भीलवाड़ा में नवनिर्वाचित सरपंच के बेटे की कार पर पत्थर फेंके जाने की घटना सामने आई। ऐसे में विवाद तो चुनाव में हुआ लेकिन रिश्ते हमेशा के लिए खराब हो गए।
जीत से बड़ी गांव की शांति :
पंचायत चुनाव का उद्देश्य गांव का विकास, जनसमस्याओं का समाधान और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। चुनावी रंजिश आपसी विश्वास को कमजोर करती है, जबकि हारने वाले प्रत्याशी के साथ खड़ा होना सामाजिक एकजुटता को मजबूत करता है। लोकतंत्र की असली जीत केवल किसी प्रत्याशी की सफलता नहींए बल्कि चुनाव के बाद भी गांव का भाईचारा और सामाजिक सौहार्द कायम रहने में है।
असली भाईचारा तो यहां दिखा :
नागौर जिले के मोड़ी गांव में सरपंच का चुनाव हारीं चिड़ी देवी के परिवार को ग्रामीणों ने 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देकर सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने ही चिड़ी देवी को चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था, इसलिए हार के बाद परिवार को अकेला छोड़ना उचित नहीं समझा। नागौर जिले के ही निंबोला गांव में चुनाव हारे बाग सिंह को ग्रामीणों ने करीब 14 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी। इसी तरह भूंडेल ग्राम पंचायत में गंगाराम नायक के समर्थन में भूंडेल, श्रीयादे नगर और नेनाऊ के ग्रामीण एकजुट हुए और करीब 15 लाख रुपए का सहयोग किया। इन उदाहरणों में चुनावी नतीजे से आगे बढ़कर सामाजिक संबंधों को महत्व देने का संदेश मिलता है।

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