वर्ल्ड आर्थराइटिस डे : वायरल इंफेक्शन और जहरीली हवा बनी नई मुसीबत, चिकनगुनिया के बाद जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा रहा ऑर्थराइटिस

चिकनगुनिया के बाद अगर लंबे समय तक रही सूजन तो हो सकता है आर्थराइटिस

वर्ल्ड आर्थराइटिस डे : वायरल इंफेक्शन और जहरीली हवा बनी नई मुसीबत, चिकनगुनिया के बाद जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा रहा ऑर्थराइटिस
चिकनगुनिया और बढ़ते वायु प्रदूषण से जोड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकनगुनिया से उबरने के बाद 15-20 प्रतिशत मरीजों में लंबे समय तक दर्द और सूजन रह सकती है। छह सप्ताह से अधिक दर्द रहने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

जयपुर। मौसम बदलते ही चिकनगुनिया और बढ़ते वायु प्रदूषण ने सेहत पर दोहरी मार देना शुरू कर दी है। चिकनगुनिया का प्रभाव केवल बुखार और शुरुआती दिनों के बदन दर्द तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह अब जोड़ों के दीर्घकालिक विकार यानी ऑर्थराइटिस का रूप ले रहा है।

वर्ल्ड ऑर्थराइटिस डे के अवसर पर सामने आए तथ्य यह दर्शाते हैं कि घटिया जीवनशैली के साथ साथ अब मौसमी बीमारियां और जहरीली हवा हड्डियों व जोड़ों की गंभीर बीमारियों को बढ़ावा दे रही हैं।

चिकनगुनिया से पीड़ित करीब 15 से 20 प्रतिशत मरीजों में ठीक होने के बाद जोड़ों में लंबे समय तक सूजन और दर्द बना रहता है।  चिकनगुनिया का असर 4 से 6 सप्ताह में खत्म हो जाना चाहिए। जब यह सूजन 3 से 8 महीने तक खिंच जाती है तो यह चिकनगुनिया ऑर्थराइटिस का रूप ले लेती है।

स्मॉग और जहरीली हवा भी जोड़ों के स्वास्थ्य की दुश्मन :

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बढ़ते वायु प्रदूषण (विशेषकर पीएम 2.5 और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उच्च स्तर) को भी जोड़ों में दर्द व गठिया के बढ़ते मामलों से सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है। प्रदूषित हवा में मौजूद जहरीले तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जिससे जोड़ों की झिल्लियां प्रभावित होने लगती हैं।

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व्हीलचेयर तक की आ सकती है नौबत :

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ऑर्थराइटिस की एडवांस स्टेज में मरीज की चलने फिरने की क्षमता कम होने लगती है, जिससे वे व्हीलचेयर पर निर्भर हो सकते हैं। अधिक समय तक गतिहीन रहने से रीढ़ की हड्डी और कमर की नसों पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में यदि बाद में घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) भी कराया जाए तो मरीज को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

                बचाव और सावधानी के प्रमुख सुझाव: (एक्सपर्ट ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ राजीव भार्गव और डॉ एसएस सोनी)

                लक्षणों को न करें नजरअंदाज: चिकनगुनिया के बाद 6 सप्ताह से अधिक दर्द रहने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लें।

                इम्यून सिस्टम का रखें ध्यान: संतुलित खानपान अपनाएं ताकि आॅटोइम्यून असंतुलन से बचा जा सके।

                प्रदूषण से बचाव: स्मॉग वाले दिनों में बाहर जाने से बचें और मास्क का प्रयोग करें।

                नियमित व्यायाम: जोड़ों की लचक बनाए रखने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से हल्का व्यायाम करें।

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