सालाना 7.68 लाख खर्च, फिर भी सूखे पौधे और गंदगी
हर्बल पार्क की पहचान पर संकट
कोटा। औषधीय पौधों के संरक्षण और शहरवासियों को प्राकृतिक व सेहतमंद वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बूंदी रोड पर विकसित हर्बल पार्क इन दिनों खुद बदहाली का शिकार है। पार्क के रखरखाव पर हर महीने करीब 64 हजार रुपए यानी सालाना 7 लाख 68 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां सफाई, पौधों की देखरेख और अन्य सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। हालत यह है कि दिनभर में गिनती के लोग ही पार्क में पहुंचते हैं।
कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) ने पार्क के रखरखाव और नई प्रजातियों के पौधे विकसित करने के लिए एक फर्म को ठेका दे रखा है। इसके बावजूद पार्क में जगह-जगह घास उगी हुई है और औषधीय पौधों की नियमित देखभाल नहीं हो रही। पार्क में लगाने के लिए मंगाए गए कचनार, नीम सहित कई पौधे एक कोने में रखे हुए हैं। लंबे समय से नहीं लगाए जाने के कारण कई पौधों की जड़ें तक बाहर निकल आई हैं और वे खराब होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
फाउंटेन पाउंड में गंदगी, वाटर चैनल भी बदहाल
पार्क में प्रवेश करते ही फाउंटेन पाउंड नजर आता है, लेकिन इसमें अभी तक फव्वारे नहीं लगाए गए हैं। पूरे पाउंड में गंदगी जमा है। अधिकारियों के अनुसार यहां फव्वारे लगाए जाने हैं। वहीं पार्क के वाटर चैनल भी बदहाल स्थिति में हैं। वर्ष 2005 में बनाए गए इन चैनलों का हाल में जीर्णोद्धार कराया गया था, लेकिन सफाई के अभाव में इनमें फिर गंदगी जमा होने लगी है। पार्क में लोगों के घूमने के लिए फुटपाथ बनाया गया है, लेकिन कई स्थानों पर सफाई नहीं होने से फुटपाथ के बीच ही छोटे पौधे और घास उग आई है। इससे नियमित रखरखाव को लेकर किए जा रहे दावों और मौके की स्थिति में अंतर नजर आता है।
एक हजार से अधिक पौधे, कई सूखने लगे
हर्बल पार्क में अपराजिता, छुईमुई, मोगरा, गुलाब, शहतूत, इलायची, अंजीर, अमरूद, रजनीगंधा और तुलसी समेत अलग-अलग प्रजातियों के करीब एक हजार छोटे-बड़े पौधे लगाए गए हैं। इनमें कई पौधे सूख चुके हैं या मुरझाने लगे हैं। पार्क के एक हिस्से में करीब 7 से 10 करोड़ रुपए की लागत से स्नेक पार्क भी विकसित किया गया, जहां दुर्लभ प्रजातियों के सांप रखने की योजना थी। स्नेक पार्क का भवन तैयार है, लेकिन इसका संचालन अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो पाया है।
वन विभाग को सौंपने की तैयारी
केडीए अब स्नेक पार्क और हर्बल पार्क को वन विभाग को सौंपने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सांपों की देखरेख वन विभाग बेहतर तरीके से कर सकता है। इस संबंध में करीब दो साल पहले वन विभाग को पत्र भी भेजा जा चुका है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही दोनों पार्क वन विभाग को सौंप दिए जाएंगे।
बारिश के कारण पार्क में घास उगी होगी। संबंधित फर्म को साफ-सफाई के निर्देश दिए जाते हैं। पूर्व में जिस फर्म के पास ठेका था, उसने पौधे मंगवाए थे, लेकिन ठेका खत्म होते ही काम बंद कर दिया। इसी वजह से उन पौधों को लगाया नहीं जा सका और उनकी जड़ें बाहर निकल आईं।
- अजय कुमार शर्मा, एक्सईएन, केडीए

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