हर रोज 10 से 12 गायों की गौशाला में मौत

पॉलीथिन खाने से मरती हैं गायें, बंधा धर्मपुरा गौशाला के निकट पशु चिकित्सालय नहीं , नहीं मिलता इलाज

हर रोज 10 से 12 गायों की गौशाला में मौत

गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम की और से गायों को पर्याप्त खाना और इलाज मुहैया नहीं कराने से उनकी मौत हो रही है।

कोटा। नगर निगम की और से संचालित बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गौवंश के मरने का सिलसिला अनवरत जारी है। गौशाला में शहर में पकड़ लाई गई बीमार और प्लास्टिक खाई हुई प्रतिदिन 10 -12 गाये काल का ग्रास बन रही है। इसके पीछे नगर निगम के अधिकारियों का कहना है। गायों पेट में तीस से चालीस किलो प्लास्टिक है। यहां चारा और पानी की सुविधा होने से गाए भरपेट खाना खा रही जिससे उनका चारा पच नहीं रहा है। ऐसे रात के समय गाय बैठ जाती है तो फिर उठ नहीं पाती है उसकी मौत हो जाती है। गौ सेवकों का कहना है कि नगर निगम की और से गायों को पर्याप्त खाना और इलाज मुहैया नहीं कराने से उनकी मौत हो रही है। 

क्षमता से अधिक हैं पशु
नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। क्षमता से अधिक गौवंश होने से वहां गायों को घूमने और फिरने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। दूसरा स्वस्थ्य और बीमार गायों को एक साथ रखा जाता है। जिससे स्वस्थ्य गाये भी बीमार हो रही है। वहां सभी गौवंश को बरसात से बचने के लिए पूरे शेड तक बने हुए नहीं हैं। ऐसे में बरसात होते ही अधिकतर गाय, बैल व बछड़े उससे बचने के लिए शेड की तरफ भागते हैं। शेड की संख्या कम होने से उसमें सीमित ही गौवंश आ पा रहे हैं। जिससे वे एक दूसरे को धक्का देकर बचने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे में उनके चोटिल होने के साथ ही गिरने से मौत हो रही है। 

पशु चिकित्सालय नहीं होने से समय पर नहीं मिलता इलाज
नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गायों को पर्याप्त खाना पानी दिया जा रहा है। लेकिन गौशाला में प्लास्टिक खाई हुई गाए ज्यादा है। यहां खाना ज्यादा खाने के बाद गाये पानी पीती है और उनका पेट फूलने लगता है। पेट प्लास्टिक होने से उनकी पाचन क्षमता पहले से कमजोर हो चुकी है। ऐसे में उनके पेट फूल जाता है रात को खाना पचाने के लिए बैठती है तो फिर उठ ही नहीं पाती है उनकी मौत हो जाती है। गौशाला में रोज कभी 5 तो कभी 7 और अधिकतम 12 -14 गायों की ही मौत होती है।  बंधा धर्मपुरा गौशाला के पास पास पशु चिकित्सालय नहीं खुलेगा तब गायों की मौत को रोक पाना मुश्किल हम गायों की देखभाल कर सकते है इलाज के लिए तो डॉक्टर और कंम्पाउडर की जरूरत होती है। रात में गाये बैठती है तो सुबह उठती ही नहीं है। मौत हो जाती है। जब यहां 10 से 12 डॉक्टर और20 कम्पाउंटर वाला पशु चिकित्सालय नहीं खुलेगा गायों की मौत नहीं रोक पाएंगे। अधिकांश मौत रात के समय होती है। ऐसे 24 घंटे वाला अस्पताल की जरूरत है। 

दिन में स्वस्थ्य दिखती रात में हो जाती बीमार
गौशाला में अधिकांश बीमार गाये आ रही है। उनके पेट में 25 से 30 किलो प्लास्टिक होता है। उनकी जांच और इलाज के लिए यहां पर्याप्त डॉक्टर और कंम्पाउंडर नहीं है। दिन में गाये स्वस्थ्य दिखती है। एक एक गाय को आधा आधा किलो आहार तो तौल कर नहीं खिला सकते है। गाये आवश्यकता से अधिक भूसा चारा खा जाती उसके बाद पानी पीते ही उनका अर्जीण होने लगता है। रात में जो गाय बैठती सुबह मरी मिलती है। गौशाला के कर्मचारी अनवृत गायों को उठाते लेकिन वो इतनी कमजोर होती है कि एक बार बैठ गई तो फिर नहीं उठती है। 

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1100 गौवंश को किया शिफ्ट
जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में कुछ समय पहले तक 4 हजार से अधिक गौवंश हो गया था। जिसे रखने की जगह तक नहीं थी। ऐसे में गौवंश की मृत्यु दर अधिक हो रही थी। जिला कलक्टर के निर्देश पर जिले की अन्य गौशालाओं को गौवंश शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। जिसकी पालना में वर्तमान में करीब 1100 गौवंश को अन्य निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है।
- नगर निगम की गौशाला है या मौत शाला

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कोटा नगर निगम कोटा दक्षिण वैसे तो गौशाला को लेकर बड़े बड़े दावे करता हुआ आ रहा है पर सच्चाई कुछ और ही नजर आ रही है अव्यवस्थाओ का आलम ऐसा है की हर तरह गंदगी के साथ मरी हुई गाय नजर आ रही है व्यवस्था बनाने की बजाय अव्यवस्था ज्यादा फैलती हुई नजर आ रही है गायों को पोषाहार का कही कोई नामोनिशान नहीं है रोजाना 20 से 25 गायों की रोजाना मृत्यु हो रही है कारण सिर्फ सूखा भूसा ही खिलाना है। 
- सुरेंद्र राठौर, पार्षद नगर निगम कोटा

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गौशाला में गायों की पूरी देखभाल की जा रही है। प्लास्टिक खाई हुई और बीमार गायों की ही मौत हो रही है। गायों को डॉक्टर को दिखाकर इलाज भी कराया जा रहा है। 
- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण  

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