फसल बीमा प्रीमियम में गड़बड़झाला, हजारों किसानों के खातों से एक ही राशि कई बार कटी
7 महीने बाद भी किसानों को नहीं लौटाई गई अतिरिक्त राशि, जिम्मेदार अधिकारी मौन, जवाब देने से कतरा रहे
कोटा। इटावा क्षेत्र में रबी फसल बीमा प्रीमियम की संदिग्ध कटौती को लेकर बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। दस्तावेजों से पता चलता है कि कई किसानों के खातों से एक ही तारीख को एक ही फसल बीमा प्रीमियम राशि दो, तीन, पांच और यहां तक कि छह बार तक काटी गई। जनवरी में हुई इस अतिरिक्त कटौती के 7 महीने बाद भी राशि पीड़ित किसानों के खातों में वापस नहीं आई है। किसानों की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दरअसल, इटावा कॉपरेटिव बैंक से संबद्ध 30 ग्राम सेवा सहकारी समितियों से करीब 19 हजार किसान जुड़े हुए हैं। ग्राम सेवा सहकारी समिति के किसानों की बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, फसल बीमा प्रीमियम के रूप में 250 से 1400 रुपए तक की राशि एक से अधिक बार काटी गई। प्रभावित किसानों की संख्या और अतिरिक्त कटौती का कुल आकलन किया जाए तो मामला करोड़ों रुपए की संभावित अतिरिक्त कटौती तक पहुंच सकता है।
एक ही प्रीमियम की बार-बार कटौती
नवज्योति को उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, रबी फसल बीमा का प्रीमियम जनवरी माह में काटा गया। कई खातों में एक ही तारीख को समान राशि दोहराकर डेबिट होने की प्रविष्टियां दर्ज हैं। कहीं राशि दो बार, कहीं तीन बार और कुछ मामलों में पांच बार तक कटौती दर्ज है।
कई स्तरों पर शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
किसानों ने ग्राम सेवा सहकारी समितियां, इटावा कॉपरेटिव बैंक, दी को-आॅपरेटिव सेंट्रल बैंक कोटा और सहकारिता विभाग के अधिकारियों को शिकायतें दीं। किसानों का कहना है कि अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई।\
नवज्योति ने मांगा जवाब, टालते रहे अधिकारी
मामले की पड़ताल के दौरान नवज्योति ने इटावा कॉपरेटिव बैंक प्रभारी तथा सहकारिता विभाग के संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। करीब दो महीने तक संपर्क के बावजूद अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि एक ही प्रीमियम राशि कई बार कैसे कटी और अतिरिक्त राशि वापस कब तक लौटाई जाएगी।
टेक्निकल मिस्टेक बताकर टालने की कोशिश
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर पर इस पूरे मामले को 'टेक्निकल मिस्टेक' बताया जा रहा है। यदि, वास्तव में यह तकनीकी त्रुटि थी तो सात महीने बाद भी किसानों की अतिरिक्त राशि वापस क्यों नहीं की गई, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
सुलगते सवाल
-एक ही प्रीमियम बार-बार कैसे कटा?
-क्या यह सिस्टम की खामी थी या प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही?
-किसानों से कुल कितनी अतिरिक्त राशि काटी गई?
-आज तक विभाग ने वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक क्यों नहीं किया?
-अतिरिक्त राशि किस खाते में गई?
-बीमा कंपनी को वास्तविक प्रीमियम कितना भेजा गया और अतिरिक्त जमा राशि का हिसाब क्या है?
-सात महीने तक पीड़ित किसानों को पैसा वापस क्यों नहीं मिला?
-यदि, इसे तकनीकी त्रुटि माना जा रहा है तो सुधार में इतनी देरी क्यों हुई?
-सहकारी समिति, कॉपरेटिव बैंक, सहकारिता विभाग या संबंधित एजेंसी—आखिर जवाबदेह कौन है?
-क्या होगी निष्पक्ष जांच?
-पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी
-पीड़ित किसानों को उनका पैसा ब्याज सहित लौटाया जाएगा?

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