आवारा श्वानों ने 453 को बनाया शिकार, हर दिन औसतन 15 लोग हो रहे डाॅग बाइट के शिकार
टोटकों से बचे , वैक्सीनेशन एकमात्र उपाय
कोटा । शहर में आवारा जानवरों, विशेषकर कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि सड़कें और गलियां आमजन व राहगीरों के लिए सुरक्षित नहीं रही हैं। बीते एक माह में केवल एमबीएस में ही आवारा जानवरों के काटने के 535 से अधिक मामले सामने आए है, जिसके बाद मरीजों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई है। शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा इस कदर बढ़ गया है कि अकेले एमबीएस अस्पताल में ही औसतन रोजाना 15 लोग कुत्तों के काटने का शिकार होकर पहुंच रहे हैं।
अस्पताल के ओपीडी आंकड़े (एक नज़र में)
-डॉग बाइट (कुत्ते के काटने के मामले): 453 मरीज
-मंकी बाइट (बंदरों के हमले): 53 मरीज
-कैट बाइट (बिल्लियों के काटने के मामले): 29 मरीज
-कुल एंटी-रेबीज टीकाकरण: 535 से अधिक मरीज
-रोजाना औसतन 15 लोग हो रहे डॉग बाइट के शिकार
जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत क्या करें?
-घाव की सफाई: घाव को तुरंत बहते पानी और डिटॉल या साधारण साबुन से कम से कम 15 मिनट तक लगातार धोएं।
-एंटीसेप्टिक लगाएं: धोने के बाद अल्कोहल युक्त एंटीसेप्टिक या पोविडोन-आयोडीन (जैसे बेटडीन) लगाएं।
-तुरंत अस्पताल जाएं: MBS अस्पताल की OPD या नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर 24 घंटे के भीतर पहली वैक्सीन (Day 0) लगवाएं।
-एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन शेड्यूल का पुरी तरह पालन करें।
-अगर डॉक्टर आपको इंट्रा-डर्मल या इंट्रा-मस्कुलर वैक्सीन की सलाह देते हैं, तो पूरा कोर्स अवश्य लें।
-क्या न करें: घाव पर मिर्च, हल्दी, चुना, या पट्टीतुरंत न बांधें जब तक डॉक्टर सलाह न दें।
पालतु हो या आवारा, खराेंच या लार भी घातक
शहर में बंदरों का आतंक भी कम नहीं है शहर के हर कोने में बने पार्को व धार्मिक स्थलों पर बंदरों के हमलों के मामले सामने आते रहतेे है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्रकार के जानवर से आपके शरीर पर लगा हुआ घाव या उसके द्वारा लगी लार भी खतरनाक है। जानवरों से पर्याप्त दुरी रखनी चाहिए। किसी भी आशंंका पर तुरन्त डॉ. से सलाह लेनी चाहिए।
रेबीज 100% जानलेवा, डॉक्टरी सलाह ही एकमात्र बचाव
वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज एक बेहद खतरनाक व 100% जानलेवा संक्रमण है। एक बार लक्षण दिखने के बाद इसका कोई इलाज संभव नहीं है। समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यकतानुसार 'रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन' (RIG) ही जीवन बचा सकता है।
सुबह टहलने से लेकर देर रात तक घर लौटने वाले सभी बन रहे शिकार
फूड डिलीवरी का काम करने वाले महेन्द्र सुमन का कहना है कि देर रात ड्यूटी से लौटने वाले वाहन चालकों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए स्थिति सबसे अधिक घातक साबित हो रही है। आए दिन कुत्तों के झुंड बाइक सवारों को गिरा देते हैं। या मासूमों पर हमला कर देते हैं। करणी नगर निवासी हर्ष ने कहा कि इसके बावजूद नगर निगम का एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम और नसबंदी अभियान पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग
सोशल इश्यू पर काम करने वाले नितीन नान्ता का कहना है कि महज अस्पताल में मेडिकल तैयारियां करने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक नगर निगम और जिला प्रशासन आवारा जानवरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक शहरवासी इस खौफ के साए में जीने को मजबूर रहेंगे।
बाेरखेडा से इलाज कराने आए देशराज ने कहा कि 3 दिन पहले में कुत्तें काे रोटी डाल रहा था तभी उसने अजीब सा बर्ताव किया मै कुछ समझ पाता मेरी ऊंगली चबा ली। अब इन्जेक्शन लगवाने आया हूँ।
आम लोगों काे काटने व हमलावर प्रवृति के आवारा कुत्तों को रखने के लिए स्थाई शेल्टर बनवाने का टेण्डर जारी कर दिया गया है। शहर से पकडे गए जानवरों की शिकायतों के आधार पर इन्हें यहां रखा जाएगा। इसके अलावा वेक्सीनेशन का काम लगातार किया जा रहा है।
- ओमप्रकाश मेहरा आयुक्त नगर निगम कोटा
किसी भी स्थिति में सेल्फ-ट्रीटमेंट न करें
कुन्हाडी सीएचसी के प्रभारी डॉ चन्द्रप्रकाश कलवार बताते है कि जानवर के काटने, खरोंचने या दांत लगाने पर घाव पर पट्टी बांधने या ढकने के बजाय उसे तुरंत बहते पानी और साबुन/डिटर्जेंट या एंटीसेप्टिक लोशन से अच्छी तरह साफ करें। घाव पर चूना, मिर्च, हल्दी या कोई अन्य घरेलू चीज बिल्कुल न लगाएं। यह संक्रमण को और अधिक बढ़ा सकता है। किसी भी स्थिति में सेल्फ-ट्रीटमेंट न करें। घटना के तुरंत बाद डॉक्टर से परामर्श लें, टिटनेस का टीका लगवाएं और डॉक्टर की सलाह पर एंटी-रेबीज नोजल/वैक्सीनेशन का पूरा कोर्स करवाएं।
किसी भी प्रकार की चोट खरौच को नजर अंदाज बिल्कूल न करें घाव को तत्काल साफ पानी से धाेने के बाद तत्काल चिकित्सीय सलाह के लिए अस्पताल लेकर जाएं। ध्यान रहें किसी भी प्रकार के वैक्सीनेशन की सलाह को नजरअंदाज बिल्कुल न करें।
-डॉ. राकेश सिंह अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा

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