Voice of Gen-A & Alpha: 300 साल से जल रहा रावण, फिर भी हर साल रह जाती है कोई न कोई "खामी"!
लाखों के रावण पर सवाल, कोटा की पहचान से कब तक खिलवाड़?
कोटा। रावण को हर साल जलाया जाता है, लेकिन लगता है उसकी खामियां अमर हो गई हैं! तीन सौ साल से भी ज्यादा समय से चली आ रही दशहरे की परंपरा में रावण का पुतला आज भी हर साल किसी न किसी वजह से चर्चा में आ जाता है। कभी कद उम्मीद से बड़ा हो जाता है, कभी लंबाई के चक्कर में ढांचा लड़खड़ा जाता है और कभी रावण गिर जाता है। दैनिक नवज्योति के ह्यवॉयस ऑफ यूथ एंड अल्फाह्ण अभियान में युवाओं ने दशहरे पर दहन होने वाले रावण के पुतले को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। युवाओं का कहना है कि कोटा का रावण महज बांस, कागज और आतिशबाजी से बना पुतला नहीं, बल्कि शहर की पहचान और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में उसका निर्माण और दहन दोनों गंभीरता से होने चाहिए।
यह हमारे कोटा की पहचान है
रावण का पुतला सिर्फ एक पुतला नहीं है। यह हमारी संस्कृति और परंपरा की याद दिलाता है। सालों से हर वर्ष जलने वाले इस पुतले को बनाने और जलाने में कम से कम थोड़ी तो गंभीरता रखनी चाहिए। उसकी लंबाई का ध्यान रखना जरूरी है। यदि लंबा पुतला सही तरीके से नहीं बनाया जा सकता, तो उसकी ऊंचाई कम रखनी चाहिए। कुल मिलाकर, एक बार जो गलती हो जाए, उसे दोबारा नहीं दोहराना चाहिए, ताकि शहर को हंसी का पात्र न बनना पड़े।
-इशिका नायक, कॉलेज स्टूडेंट
कमेटी को पहले स्ट्रक्चर बनाना चाहिए
रावण बनाने के लिए मेला समिति को गंभीरता दिखानी चाहिए। इसके लिए पहले एक निश्चित स्ट्रक्चर तैयार किया जाए और तय किया जाए कि पुतले की ऊंचाई कितनी होगी तथा उसमें कितनी आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाएगा। पिछले साल रावण के निर्माण और दहन में जो कमियां रह गईं, उनका आकलन कर उन्हें दूर करना चाहिए। साथ ही आमजन से भी चर्चा की जानी चाहिए कि वे दशहरे पर कैसा रावण देखना चाहते हैं। हर साल नया रावण बनाने के साथ पुरानी गलतियों से भी सीखना जरूरी है।
-जतिन मिर्जा मुशर्रफ,कॉलेज स्टूडेंट
रावण छोटा बनाओ, लेकिन परफेक्ट बनाओ
यदि मेला समिति से ऊंचा रावण सही तरीके से नहीं बन पा रहा है, तो उसकी ऊंचाई कम कर देनी चाहिए। कम से कम पुतला मजबूत और सही आकार का तो बने। रावण दहन देखने के लिए सैकड़ों लोग पहुंचते हैं, लेकिन जब पुतला गिर जाता है या एक-दो मिनट में कागज की तरह जल जाता है, तो लोगों को निराशा होती है। कई लोग मजाक भी बनाते हैं। समिति ठेका तो दे देती है, लेकिन निर्माण के दौरान पर्याप्त निगरानी नहीं होती। इसकी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि लोगों का उत्साह फीका न पड़े।
-भावना सुमन, कॉलेज स्टूडेंट
सवाल सिर्फ रावण की ऊंचाई का नहीं, जिम्मेदारी का भी है
रावण कितना ऊंचा बने, यह बाद की बात है; पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि वह मजबूत बने, सुरक्षित तरीके से खड़ा रहे और दहन के दौरान आयोजन की गरिमा बनी रहे। मेला समिति को निर्माण की गुणवत्ता, समय-समय पर निरीक्षण और दहन की तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए। आखिर कोटा का रावण देखने के लिए लोग उत्साह से आते हैं। ऐसे में हर साल किसी नई खामी के कारण चर्चा में आने के बजाय रावण अपनी भव्यता और बेहतर आयोजन के लिए पहचाना जाए, यही युवाओं की अपेक्षा है।
-मनीष राठौर, कॉलेज स्टूडेंट

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