‘Voice Of Gen - Z & Alpha’ : जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिक पदों के लिए शिक्षा की अनिवार्यता क्यों नहीं?
पढ़े-लिखे प्रतिनिधि से बेहतर नीतियों और विकास कार्यों की उम्मीद
कोटा । जब एक चतुर्थ श्रेणी नौकरी के लिए भी शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा और साक्षात्कार जरूरी हैं, तो जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिक पदों के लिए शिक्षा की अनिवार्यता क्यों नहीं? इसी सवाल को लेकर दैनिक नवज्योति के ‘वाइस ऑफ जेन जी एंड अल्फा’ अभियान में युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। युवाओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को कानून, योजनाओं, बजट और प्रशासन की बुनियादी समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार शैक्षणिक योग्यता तय होने से जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और जनता की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठा सकेंगे।
शैक्षणिक योग्यता निर्धारित हो
जनप्रतिनिधियों का चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित होनी चाहिए। पढ़ा-लिखा प्रतिनिधि सरकारी योजनाओं, नियमों और आमजन की जरूरतों को बेहतर समझकर प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। इससे जनता को योजनाओं का अधिक लाभ मिलने की उम्मीद रहेगी।
- अन्तिमा कुमारी, कॉलेज स्टूडेन्ट
बेसिक जानकारी भी नहीं होती
कई मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को बुनियादी जानकारी तक नहीं होने की बात सामने आती है। ऐसे में युवाओं का मानना है कि प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र, जिम्मेदारियों और अधिकारों की स्पष्ट समझ होनी चाहिए, ताकि जनता से जुड़े मुद्दे प्रभावी ढंग से उठ सकें।
-आर्यन खारोल, युवा
पेपर लीक होना आम बात
चुनाव लड़ने के लिए डिग्री अनिवार्य करने की जरूरत है। पद मिलने के बाद उसका इस्तेमाल जनता के हित में कैसे किया जाए, इसकी समझ जरूरी है। युवाओं का कहना है कि व्यवस्था की कमियों का असर रोजगार और परीक्षाओं पर भी पड़ता है।
- नेहा कुशवाह, कॉलेज स्टूडेन्ट
पढ़े-लिखे की सोच अलग
यदि जनप्रतिनिधि शिक्षित होगा तो वह आमजन और युवाओं की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकेगा। उनकी जरूरतों के अनुरूप नीतियों और विकास कार्यों पर चर्चा करना आसान होगा। इसलिए राजनीति में चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता पर विचार होना चाहिए।
- दीपांशु सैन, कॉलेज स्टूडेन्ट

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