Voice of Gen-Z & Alpha : लड़कियों में अब नहीं घबराहट, पुरुषों के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप हो
महिला सुरक्षा के साथ जागरूकता और त्वरित कार्रवाई को बताया जरूरी
कोटा । रात के समय शहर की सड़कों पर बेखौफ ... क्या कोटा की युवतियां खुद को इतना सुरक्षित महसूस करती हैं? सुरक्षा को लेकर पुलिस की सक्रियता के बावजूद क्या अब भी ऐसे इलाके हैं, जहां रात ढलते ही डर का माहौल बन जाता है? युवाओं का कहना है कि कोटा में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और महिला सुरक्षा के लिए उपलब्ध सुविधाएं सुरक्षा का भरोसा बढ़ाती हैं, लेकिन कुछ सुनसान इलाकों, कोचिंग क्षेत्रों और कॉलेजों के आसपास रात में गश्त और मजबूत करने की जरूरत है। युवाओं ने सुझाव दिया कि रात में पुलिस को केवल वर्दी और पुलिस वाहनों में ही नहीं, बल्कि सिविल ड्रेस में भी गश्त करनी चाहिए। उनका तर्क है कि वर्दी या पुलिस जीप दिखाई देने पर कई बार संदिग्ध भाग निकलते हैं, जबकि सिविल ड्रेस में पुलिस की मौजूदगी से ऐसे लोगों को मौके पर ही पकड़ा जा सकता है। इसके साथ ही युवाओं ने लड़कियों के लिए चलाए जा रहे सेल्फ डिफेंस कार्यक्रमों के साथ लड़कों और पुरुषों के लिए जेंडर सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप आयोजित करने की जरूरत भी बताई।
“कोचिंग एरिया में गश्त बढ़े”
कोचिंग एरिया में आए दिन झगड़े और चाकूबाजी की घटनाएं सुनने को मिलती हैं। इनमें लैडमार्क क्षेत्र का नाम भी सामने आता है। कोटा में बाहर से काफी छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। ऐसे में पुलिस को इन क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ानी चाहिए। कोई अपराध होने पर तत्काल कार्रवाई हो। कॉलेजों के बाहर भी गश्त बढ़ाई जानी चाहिए।
- रिद्धम शर्मा, स्टूडेन्ट
“सिविल ड्रेस में भी हो गश्त”
कोटा शहर बहुत सुरक्षित है। राजकॉप सिटीजन एप के माध्यम से संपर्क करने पर पुलिस तुरंत पहुंचती है। महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए 112, 100 सहित अन्य सुविधाएं भी हैं। रात में शहर के चौराहों और प्रमुख रास्तों पर पुलिस की मौजूदगी रहती है। लड़कियों में घबराहट नहीं है।फिर भी पुलिस को सिविल ड्रेस में भी गश्त करनी चाहिए, ताकि संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जा सके।
-कावेरी कुमारी, स्टूडेन्ट
“लड़कों की भी हो वर्कशॉप”
कोटा शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन गंभीर हैं। सेल्फ डिफेंस कैंप और महिला सुरक्षा से जुड़ी पहलें अच्छी हैं, लेकिन सिर्फ महिलाओं को अपनी सुरक्षा करना सिखाना पर्याप्त नहीं है। हर कॉलेज, कार्यस्थल और समुदाय में लड़कों और पुरुषों के लिए जेंडरसेंसिटाइजेशन वर्कशॉप होनी चाहिए। पुरुषों को भी सम्मान और समानता की शिक्षा मिलनी जरूरी है। असली बदलाव जमीनी स्तर से शुरू होगा।
-हंसवी रावल, कॉलेज स्टूडेन्ट
“सुनसान इलाकों पर रहे नजर”
कोटा शहर अच्छा और सुरक्षित है। रात में भी आसानी से घूम सकते हैं, लेकिन अभी भी कई इलाके ऐसे हैं, जो रात में सुनसान रहते हैं। ऐसे स्थानों पर संदिग्ध लोग घूमते रहते हैं, जिससे महिलाओं के साथ-साथ हर वर्ग के व्यक्ति को खतरा रहता है। इन इलाकों में रात्रि गश्त बढ़ाने के साथ संदिग्ध और अपराधी तत्वों को चिन्हित कर कार्रवाई करनी चाहिए।
- सूर्यकांत नागर, कॉलेज स्टूडेन्ट
युवाओं के प्रमुख सुझाव
-सुनसान और संवेदनशील इलाकों में रात के समय गश्त बढ़ाई जाए।
-कोचिंग संस्थानों और कॉलेजों के आसपास पुलिस की नियमित मौजूदगी रहे।
-रात में पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में भी गश्त करें।
-संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
-महिला सुरक्षा के साथ लड़कों और पुरुषों के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम हों।
-युवाओं को उपलब्ध पुलिस हेल्पलाइन और सुरक्षा सुविधाओं की जानकारी दी जाए।

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