गौशाला में दवाओं के लिए करना होगा इंतजार

आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही होंगे टेंडर

गौशाला में दवाओं के लिए करना होगा इंतजार
वर्तमान में हालत यह है कि यहां पशुओं के लिए आवश्यक दवाएं समाप्त हो चुकी है।

कोटा ।  लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में कई आवश्यक काम भी नहीं हो पा रहे हैं। उन्हीं में से एक काम है नगर निगम की गौशाला में गौवंश के लिए दवाएं क्रय करना। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में करीब ढाई हजार से अधिक संख्या में गौवंश है। जिनमें गाय से लेकर बैल व बछड़े तक शामिल हैं। अधिकतर गौवंश को सड़कों पर लावारिस हालत में घूमते हुए पकड़ा गया है। ऐसे में उनमें से अधिकतर बीमार, कमजोर व चोटिल भी है। गौशाला में आने वाले ऐसे पशुओं के लिए वहां पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित किया जाता है। जहां हर साल पर्याप्त मात्रा में दवाएं क्रय की जाती है। लेकिन वर्तमान में हालत यह है कि यहां पशुओं के लिए आवश्यक दवाएं समाप्त हो चुकी है। लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण दवाएं क्रय करने का टेंडर तक नाहीं हो पा रहा है। 

आयुक्त ने कलक्टर को लिखा था पत्र
आचार संहिता के दौरान गौशाला में दवाओं का टेंडर करने के लिए नगर निगम कोटा दक्षिण की आयुक्त ने जिला कलक्टर को पत्र भी लिखा था। जिसमें दवाओं के टेंडर करने की अनुमति चाही थी। लेकिन हालत यह है कि करीब एक महीना होने को है। उसके बाद भी अभी तक न तो अनुमति मिली है और न ही दवाएं मिली हैं। 

समय पर टेंडर नहीं करने से हो रही परेशानी
नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि गौशाला में अधिकतर लावारिस पकड़ी गई गायों में बीमार व कमजोर और चोटिल हैं। जिनके लिए आवश्यक दवाएं तक गौशाला में नहीं है। निगम अधिकारियों द्वारा समय से टेंडर नहीं करने के कारण यह परेशानी हो रही है। अधिकािरयों को पता था कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में टेंडर नहीं हो पाएंगे। उसके बाद भी पहले से दवाईयों की व्यवस्था नहीं की। अब जैसे-तैसे व्यवस्था करनी पड़ रही है।

आचार संहिता के बाद ही होंगे टेंडर
नगर निगम कोटा दक्षिण के उपायुक्त महावीर सिंह सिसोदिया ने बताया कि गौशाला में दवाएं समाप्त हो गई है। उनके टेंडर के लिए जिला कलक्टर से अनुमति का पत्र भी लिखा था। लेकिन फिलहाल कोई अनुमति नहीं मिली है। अब आचार संहिता समाप्त होने के बाद जून में ही दवाओं के टेंडर हो पाएंगे। हालांकि अभी आवश्यक दवाओं की व्यवस्था सहयोग से की जा रही है। 

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