नेपाल में दिवाली पर क्यों होती है कुत्तों की पूजा? कुकुर तिहार की इस अनोखी परंपरा के बारें में जान कर चौंक जाएंगे आप
बेजुबानों के प्रति प्रेम और दया का संदेश
नई दिल्ली। भारत में दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है, वहीं नेपाल में इस अवसर पर कुत्तों के सम्मान में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘कुकुर तिहार’ कहते हैं। यह नेपाल के पांच दिवसीय तिहार उत्सव का दूसरा दिन होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुत्तों को मृत्यु के देवता यमराज का दूत माना जाता है। हिंदू महाकाव्य महाभारत में भी कुत्ते की वफादारी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि युधिष्ठिर ने स्वर्ग की यात्रा के दौरान अपने वफादार कुत्ते का साथ नहीं छोड़ा था।
इस दिन लोग पालतू और आवारा, दोनों तरह के कुत्तों को फूलों की माला पहनाते हैं और माथे पर तिलक लगाकर उनका सम्मान करते हैं। उन्हें दूध, मांस और अन्य पसंदीदा भोजन भी दिया जाता है।
कुकुर तिहार का संदेश है कि जानवर भी प्रेम, सम्मान और देखभाल के हकदार हैं। यह परंपरा इंसानों और जानवरों के बीच के गहरे रिश्ते को दर्शाती है।

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