ISRO को बड़ी सफलता, नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 की पहली कक्षा उन्नयन प्रक्रिया पूरी
सैन्य निगरानी और नागरिक नेविगेशन को मिलेगा नया बल
चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 की पहली कक्षा उन्नयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। शुक्रवार देर रात उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित किए जाने के कुछ घंटे बाद यह प्रक्रिया पूरी की गई। इसरो ने रविवार को जारी अपडेट में बताया कि पहली नियोजित कक्षा उन्नयन प्रक्रिया के दौरान उपग्रह में लगे लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) इंजन को 2,174.8 सेकंड तक चालू रखा गया।
एनवीएस-03 को 30 अक्टूबर को रात 23:51 बजे जीएसएलवी-एफ18 प्रक्षेपण यान की मदद से 170.3 किलोमीटर गुणा 38,080 किलोमीटर की जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था। यह नाविक उपग्रह समूह का तीसरा उपग्रह है। इसरो के अनुसार, पहली कक्षा उन्नयन प्रक्रिया 31 अक्टूबर, 2026 को शाम 16:48 बजे सफलतापूर्वक पूरी हुई। इसके बाद उपग्रह की अनुमानित कक्षा 5,477.6 किलोमीटर गुणा 37,833.4 किलोमीटर हो गई। उपग्रह की स्थिति सामान्य है। आने वाले दिनों में इसे 111.75 डिग्री पूर्वी कक्षीय स्थान पर भूस्थिर कक्षा (जीएसओ) में स्थापित करने के लिए आगे की कक्षा उन्नयन प्रक्रियाएं निर्धारित हैं।
कुल 2,250 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 अगली पीढ़ी की भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (नाविक) का हिस्सा है। इसे आईआरएनएसएस श्रृंखला की नेविगेशन सेवाओं में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। उपग्रह में स्वदेशी परमाणु घड़ी के साथ खरीदी गई घड़ियां भी लगाई गई हैं। इसमें एल5 और एस-बैंड संकेतों के अलावा एल1 सिग्नल भी शामिल है। इसकी कवरेज भारतीय भूभाग और देश की भौगोलिक सीमा से 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में होगी।
नाविक को मजबूत करने और रक्षा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एनवीएस-03 का प्रक्षेपण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल अंतरिक्ष में नाविक प्रणाली के तीन उपग्रह- पहली पीढ़ी के दो आईआरएनएसएस अंतरिक्ष यान और एनवीएस-01- सेवाएं दे रहे हैं। एनवीएस-03 के भूस्थिर कक्षा में पहुंचने और परिचालन शुरू करने के बाद नाविक के लिए आवश्यक चार उपग्रहों की न्यूनतम संख्या पूरी हो जाएगी। इससे सैन्य निगरानी क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नाविक भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है। इसे भारत और उसके आसपास के लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति निर्धारण, नेविगेशन और समय (पीएनटी) सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। यह नागरिकों के लिए मानक स्थिति निर्धारण सेवा और भारतीय सेना जैसे अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एन्क्रिप्टेड प्रतिबंधित सेवा, दो तरह की सेवाएं प्रदान करती है।
इसरो के अनुसार, एनवीएस-03 के भूस्थिर कक्षा में स्थापित होने के बाद नाविक प्रणाली की स्वतंत्र त्रि-आयामी स्थिति निर्धारण सेवाएं बहाल होंगी। इसके लिए चार उपग्रहों की अनिवार्य आवश्यकता पूरी होगी, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों को लाभ मिलेगा। भारत अब तक 11 नेविगेशन उपग्रह प्रक्षेपित कर चुका है। इनमें से आईआरएनएसएस-1बी, आईआरएनएसएस-1एल और एल1 बैंड समर्थन वाला एनवीएस-01 आवश्यक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। एनवीएस-03 के परिचालन शुरू करने पर यह चौथा सक्रिय उपग्रह होगा और इसरो नाविक प्रणाली को सक्रिय करेगा।
शुरुआत में भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) के नाम से शुरू की गई इस परियोजना का नाम बाद में बदलकर नाविक रखा गया था। इसका उद्देश्य भारत और उसकी सीमाओं से 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में स्थिति निर्धारण, नेविगेशन और समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराना है। नाविक के उपग्रह समूह में कुल सात उपग्रह शामिल हैं, जिनमें तीन जीटीओ और चार झुकी हुई भूस्थिर स्थानांतरण कक्षाओं में हैं। एनवीएस-01 पहले से कक्षा में है, जबकि एनवीएस-02 का मिशन असफल रहा था। एनवीएस-03 के सफल प्रक्षेपण से न्यूनतम चार उपग्रहों का समूह पूरा होने का रास्ता खुला है। इसके बाद एनवीएस-04 और एनवीएस-05 का प्रक्षेपण किया जाएगा।

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