‘समुद्र मंथन’ योजना पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, शक्ति सिंह गोहिल बोले- सरकारी धन ONGC को मिलना चाहिए, सरकार पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप
CAG रिपोर्ट के आधार पर न्यायिक जांच की मांग
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार 84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन' योजना का सीधा लाभ अडानी-वेल्सपन समूह को पहुंचाना चाहती है इसलिए तेल एवं गैस की खोज के लिए यह राशि निजी कंपनी के बजाय सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी को दी जानी चाहिए। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 'समुद्र मंथन' योजना के तहत समुद्र में तेल और गैस की खोज करने वाली कंपनियों को ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक सरकारी सहायता दी जानी है। उन्होंने सवाल किया कि जब ओएनजीसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मौजूद है तो निजी कंपनियों को सरकारी धन क्यों दिया जा रहा है।
गोहिल ने कहा कि समुद्र में तेल-गैस की खोज के लिए ब्लॉक हासिल करने और पर्यावरणीय मंजूरी समेत कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, लेकिन अडानी समूह से जुड़े तीन ब्लॉक इसके लिए पहले से ही तैयार हैं। इससे साफ है कि योजना का लाभ अडानी-वेल्सपन समूह को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में अडानी समूह और वेल्सपन ने तेल-गैस की खोज के लिए एक संयुक्त उपक्रम बनाया था, जिसमें अडानी समूह की 65 प्रतिशत और वेल्सपन की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने दावा किया कि यह कंपनी घाटे में चल रही है और 'समुद्र मंथन' योजना से उसे लाभ पहुंचाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस नेता ने गुजरात में तत्तकालीन सीएम के मुख्य मंत्रित्वकाल में तेल और गैस की खोज के लिए खर्च हुए करीब 27,000 करोड़ रुपये का उल्लेख करते हुए कहा है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इस मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) से जुड़ी कैग रिपोर्ट पर न्यायिक जांच की भी मांग की है।
गोहिल ने वेल्सपन समूह द्वारा चुनावी बॉण्ड के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को 10 करोड़ रुपये दिए जाने और अडानी समूह से जुड़ी कई परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर उद्योगपति को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से पिछले वर्षों में देश में उपलब्ध तेल और गैस की मात्रा में कमी आने को लेकर भी सवाल किया और कहा कि जब देश के युवा बेरोजगार हैं तथा किसान परेशान हैं तो 84,084 करोड़ रुपये निजी कंपनियों को क्यों दिए जा रहे हैं।

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