अमित शाह की प्रहार रणनीति का सिद्धू ने किया स्वागत, रावी सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने को दिए सात अहम सुझाव
सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर जोर
चंडीगढ़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नयी दिल्ली में राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति सम्मेलन प्रहार का उद्घाटन किए जाने के एक दिन बाद, पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू ने इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि इस राष्ट्रीय रणनीति की सफलता के लिए इसे पंजाब, विशेषकर रावी नदी की भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण सीमा पर जमीनी स्तर के उपायों के साथ जोडऩा अनिवार्य है। सिद्धू ने मंगलवार को इस संबंध में गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर सात महत्वपूर्ण सुझाव भेजे हैं। उन्होंने इस पत्र की प्रतियां पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी भेजी हैं।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि रावी नदी हर मानसून में अपना रास्ता बदलती है, जिसके कारण पारंपरिक बाड़ लगाना व्यावहारिक नहीं रहता। उन्होंने सुझाव दिया कि असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर तैनात कॉम्प्रीहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईबीएमएस) के सेंसर और रडार नेटवर्क को रावी और सतलुज के नदीय क्षेत्रों में भी लागू किया जाये। सीमा सुरक्षा बल और राज्य सिंचाई विभाग संयुक्त रूप से ऐसी बाड़ डिजाइन करें, जो 2025 जैसी विनाशकारी बाढ़ को झेल सकें, जिसने सीमा चौकियों को जलमग्न कर दिया था।
नशीले पदार्थों और ड्रोन के बढ़ते खतरे पर पूर्व गृह सचिव ने कहा कि रिकवरी डेटा के आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करके ड्रोन के ड्रॉप जोन का सटीक पूर्वानुमान लगाया जाये। सीमावर्ती जिलों में समर्पित नारकोटिक्स और आतंकवाद के मामलों की सुनवाई के लिए अदालतें स्थापित की जाएं, जिनके पास अपनी फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं हों। सीमावर्ती युवाओं को राष्ट्रीय नशा विरोधी अभियान के तहत नशामुक्ति, पुनर्वास और रोजगार के उचित अवसर दिये जायें।
सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा,प्रहार एक मजबूत मुक्का है और पंजाब में इसकी कलाई सीमावर्ती गांव हैं। अगला निवेश वहीं होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने मांग की कि गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर एक स्थायी पुल का निर्माण किया जाए, जहां के ग्रामीण वर्तमान में मौसमी पीपे के पुल पर निर्भर हैं। कटीली बाड़ के पार खेती करने वाले किसानों के लिए गेट के खुलने का समय अनुकूल हो और उन्हें उचित मुआवजा मिले। सीमावर्ती ब्लॉकों में तैनात शिक्षकों, डॉक्टरों और राजस्व कर्मचारियों को हार्डशिप इंसेंटिव (कठिन क्षेत्र भत्ता) दिया जाये।
सिद्धू ने सुझाव दिया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब करने के लिए सीमा पर मार गिराये गये हर ड्रोन का दस्तावेजीकरण वैश्विक साक्ष्य के रूप में करना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने मानवीय ²ष्टिकोण अपनाते हुए करतारपुर कॉरिडोर को खुला रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि देश अब अपनी कमजोर देश की पुरानी छवि को छोड़ चुका है, और मई 2025 में चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे बड़ा प्रमाण था। सीमा को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को साझेदार के रूप में काम करना होगा।

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